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मैहर में राशन दुकान से 26 क्विंटल खाद्यान्न गायब

ग्रामीणों ने कोटेदार पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- राशन बेचकर रची चोरी की झूठी कहानी

मैहर की उमरी पिपरी ग्राम पंचायत की सरकारी राशन दुकान से 26 क्विंटल खाद्यान्न गायब होने का मामला सामने आया है। कोटेदार ने अनाज चोरी का दावा किया।

ग्रामीणों ने कोटेदार पर लगाया गंभीर आरोप कहा- राशन बेचकर रची चोरी की झूठी कहानी

मैहर में राशन दुकान से 26 क्विंटल खाद्यान्न गायब |

मैहर: मध्य प्रदेश में मैहर जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उमरी पिपरी स्थित शासकीय उचित मूल्य की दुकान में 26 क्विंटल खाद्यान्न के गायब होने से क्षेत्र में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर कोटेदार अनिल साकेत द्वारा दुकान से 26 क्विंटल अनाज चोरी होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों ने कोटेदार पर ही राशन का कालाबाज़ारी करने और चोरी का झूठा नाटक रचने का सीधा आरोप लगाया है।

चोरी के दावों पर खड़े हुए सवाल

सूत्रों के अनुसार, कोटेदार अनिल साकेत ने मामले को लेकर देहात थाना पहुंचकर खाद्यान्न चोरी की शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया था। हालांकि, देहात थाना पुलिस की सूझबूझ और तत्परता के चलते जब पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बारीकी से निरीक्षण व परीक्षण किया, तो दुकान पर किसी भी प्रकार के ताले टूटने या सेंधमारी जैसी घटना के साक्ष्य नहीं पाए गए। इसके बाद चोरी के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

लाभार्थियों तक नहीं पहुंचता राशन: ग्रामीण 

ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद हितग्राहियों के लिए भेजा गया खाद्यान्न कभी लाभार्थियों तक पहुंचा ही नहीं। उन्हें निर्धारित मात्रा में राशन नहीं मिल रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि कोटेदार ने 26 क्विंटल खाद्यान्न खुद ही बेच दिया और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए चोरी की झूठी कहानी गढ़ दी।

गड़बड़ी और अनियमितता प्रमाणित होने पर होगी कार्रवाई

इस मामले को लेकर गांव में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मैहर जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मांग की है कि ​राशन दुकान के स्टॉक रजिस्टर और वितरण रजिस्टर की गहनता से जांच की जाए। ​मौके पर उपलब्ध राशन का भौतिक सत्यापन कराया जाए। ​राशन लेने वाले हितग्राहियों के रिकॉर्ड की निष्पक्ष पड़ताल की जाए। ​ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जांच में गड़बड़ी और अनियमितता प्रमाणित होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि पात्र हितग्राहियों को उनका हक मिल सके। 

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