झालावाड़ के पिड़ावा क्षेत्र में ढाई घंटे में तीन बार भूकंप के झटके महसूस हुए। दहशत में लोग घरों से बाहर निकले, कुछ मकानों में दरारों की सूचना है।
झालावाड़ (राजस्थान)। जिले के पिड़ावा उपखंड क्षेत्र में मंगलवार सुबह करीब ढाई घंटे के दौरान तीन बार धरती हिलने के झटके महसूस किए गए। झटके ग्राम पंचायत नोलाई क्षेत्र के नोलाई, बरखेड़ी, खजुरी, नापाखेड़ी और आवर गांवों में महसूस होने की बात सामने आई है। अचानक धरती हिलने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई और लोग घरों से निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। कुछ मकानों में दरारें आने और घरों में रखे बर्तन गिरने की भी सूचना है।
7:15, 8:20 और 9:50 बजे महसूस हुए झटके
ग्रामीणों के अनुसार पहला झटका सुबह करीब 7:15 बजे, दूसरा 8:20 बजे और तीसरा झटका 9:50 बजे महसूस हुआ। तीसरे झटके के बाद फिलहाल किसी अन्य झटके की सूचना नहीं है। झटकों के दौरान स्कूलों में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से स्कूल भवनों से बाहर निकालकर खुले मैदान में बैठाया गया। इसके बाद क्षेत्र के स्कूलों में छुट्टी कर दी गई।
प्रशासन और पुलिस ने लिया जायजा
घटना की जानकारी मिलने पर पिड़ावा तहसीलदार धनराज गोचर, पिड़ावा थानाधिकारी रामपाल यादव सहित प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से जानकारी ली और प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। ग्रामीण किसी तरह के खतरे की आशंका को देखते हुए घरों के अंदर जाने से बच रहे हैं और खुले स्थानों पर मौजूद हैं।
तहसीलदार ने दी सावधानी बरतने की सलाह
पिड़ावा तहसीलदार धनराज गोचर ने बताया कि ग्रामीणों के अनुसार सुबह 9:50 बजे तीसरा झटका महसूस हुआ। इस दौरान घरों में रखे बर्तन गिरने और कुछ स्थानों पर मकानों में दरारें आने की जानकारी मिली है। सुरक्षा के लिहाज से ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है से झालावाड़ जिला मुख्यालय से भूकंप की जांच के लिए टीम रवाना की गई है। टीम के मौके पर पहुंचकर जांच करने के बाद ही झटकों की वास्तविक प्रकृति और तीव्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। क्षेत्र गागरिन बांध के नजदीक होने के कारण प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से देख रहा है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी झटकों की वास्तविक स्थिति
उपखंड अधिकारी दिनेश मीणा को घटना की जानकारी दी गई है। प्रशासन की ओर से झालावाड़ जिला मुख्यालय से भूकंप की जांच के लिए टीम रवाना की गई है। टीम के मौके पर पहुंचकर जांच करने के बाद ही झटकों की वास्तविक प्रकृति और तीव्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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