सूरत के अश्विनी कुमार इलाके में एक ज्वेलरी कंपनी के अंदर ईटीपी (Effluent Treatment Plant) टैंक की सफाई करने उतरे चार मजदूरों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई।
सूरत (गुजरात)। सूरत से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है जहां रविवार सुबह अश्विनी कुमार इलाके में एक ज्वेलरी कंपनी के अंदर ईटीपी (Effluent Treatment Plant) टैंक की सफाई करने उतरे चार मजदूरों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने फिलहाल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एक को बचाने में डूबे बाकी तीन साथी
सूरत के डीसीपी जोन-1, आलोक कुमार ने मीडिया को बताया कि यह हादसा उस समय हुआ जब ज्वेलरी सफाई के बाद निकलने वाले कचरे के टैंक की रूटीन सफाई चल रही थी। रविवार सुबह चार मजदूरों की एक टीम इस काम के लिए टैंक में उतरी थी। सफाई के दौरान अचानक एक मजदूर का संतुलन बिगड़ा और वह टैंक में गिर गया। उसे बचाने के चक्कर में बाकी के तीन मजदूर भी एक-एक करके उसी जहरीले दलदल में समा गए। इस हादसे में चारों मजदूरों की जान चली गई।
दो महीने में होती थी सफाई, सुरक्षा उपकरणों की खुली पोल
पुलिस के मुताबिक, ज्वेलरी की साफ-सफाई से निकलने वाला केमिकल युक्त कचरा इस सेप्टिक टैंक में इकट्ठा होता है। इस कचरे (स्लज) को हटाने के लिए हर दो महीने में टैंक की सफाई की जाती है। पुलिस अधिकारी ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए बताया कि शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज देखने से साफ पता चलता है कि मजदूरों के पास सुरक्षा का कोई जरूरी साजो-सामान नहीं था। सेफ्टी गियर न होने की वजह से ही यह बड़ा हादसा हुआ।
केमिकल प्वॉइजनिंग से मौत की आशंका, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
डीसीपी आलोक कुमार ने आगे बताया कि प्रथम दृष्टया मौत की वजह केमिकल प्वॉइजनिंग यानी रासायनिक जहर का असर लग रही है। ऐसे मामलों में जब अचानक मौत होती है, तो दम घुटने के पीछे जहरीली गैस और केमिकल ही वजह होते हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मौत के असली कारणों की सटीक पुष्टि डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी। मजदूर सुबह-सुबह काम पर आए थे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण जहरीली गैस का शिकार हो गए।
पानी का टैंक समझकर पहुंची थी फायर ब्रिगेड, अंदर था मौत का जाल
हादसे की भयावहता को लेकर डिविजनल फायर ऑफिसर रंजीत सिंह ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया, "जब हमारे पास कॉल आई थी, तो हमें बताया गया था कि कुछ लोग पानी के टैंक में गिर गए हैं। लेकिन जब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो नजारा बिल्कुल अलग था। वह पानी का टैंक नहीं, बल्कि केमिकल कचरे का टैंक था। उसमें बेहद खतरनाक जहरीली गैस जमा हो चुकी थी। गैस की मात्रा (Consitration) इतनी ज्यादा थी कि चारों मजदूर वहां काम करते वक्त तुरंत बेहोश होकर गिर पड़े।" फायर ब्रिगेड ने चारों को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल भेजा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। प्रशासन ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
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