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सर्पदंश से 4 वर्षीय बच्चे की मौत

शाजापुर में सर्पदंश से 4 वर्षीय बच्चे की मौत, झाड़-फूंक में समय गंवाने से बिगड़ी हालत

शाजापुर में सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक में समय गंवाने से 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। डॉक्टरों ने समय पर अस्पताल पहुंचने और एंटी-स्नेक वेनम से इलाज कराने की अपील की।

शाजापुर में सर्पदंश से 4 वर्षीय बच्चे की मौत झाड़-फूंक में समय गंवाने से बिगड़ी हालत

4-Year-Old Dies of Snakebite in Shajapur After Delay in Treatment |

शाजापुर (मध्य प्रदेश)। शाजापुर अस्पताल में सांप के काटने से गंभीर रूप से भर्ती चार साल के बच्चे की शनिवार देर रात मौत हो गई। परिजनों ने बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के लिए ले जाकर महत्वपूर्ण समय गंवा दिया था। आज रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

झाड़-फूंक में गंवाया कीमती समय

जानकारी के अनुसार, घटना शाजापुर जिले की मोहन बड़ोदिया तहसील के ग्राम उस्मानखेड़ी में हुई। शनिवार सुबह करीब सात बजे ईश्वर सिंह के चार साल के बेटे प्रीतम को घर के सामने खेलते समय एक जहरीले सांप ने काट लिया था।बच्चे ने तुरंत परिजनों को घटना की जानकारी दी, लेकिन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय देवस्थान पर झाड़-फूंक के लिए ले जाया गया। इस दौरान अधिक समय निकल गया, जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उसे सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी। गंभीर अवस्था में बच्चे को बाद में शाजापुर के जिला अस्पताल लाया गया।

डॉक्टरों की कोशिश नाकाम, इलाज के दौरान मौत

जिला अस्पताल के डॉक्टर डॉ. यशवंत नायक ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसकी सांसें रुकने लगी थीं, जिसके बाद तत्काल इंट्यूबेशन कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर इलाज शुरू किया गया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद शनिवार रात उसकी मौत हो गई।अस्पताल पुलिस चौकी के अनुसार, वार्ड बॉय राजीव गिरजे द्वारा डॉ. प्रताप जाट की मौत सूचना के आधार पर धारा 194 बीएनएसएस के तहत मर्ग कायम किया गया है। मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

डॉक्टरों की अपील: झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल जाएं

डॉ. यशवंत नायक ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध रहता है, जिससे समय पर इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।

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