PTS के छह नव-आरक्षकों को वर्दी पहनकर रील बनाना महंगा पड़ा। आरक्षकों ने ट्रेनिंग के दौरान वर्दी की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए एक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
रीवा। जिले के पुलिस प्रशिक्षण शाला (PTS) के छह नव-आरक्षकों को वर्दी पहनकर रील बनाना महंगा पड़ा। आरक्षकों ने ट्रेनिंग के दौरान वर्दी की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए एक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होने पर पुलिस मुख्यालय और विभाग की छवि पर सवाल उठने लगे, जिसके चलते एसपी पीटीएस रीवा ने सभी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है।
विवादास्पद डायलॉग
वीडियो में आरक्षक डायलॉग बोलते नजर आ रहे हैं, "शक्ल अच्छी नहीं है तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है ना...।", "हमारे पास पैसा नहीं है तो क्या हुआ, मंथली (वेतन) तो आता है ना...", "हमारे पास कपड़ा नहीं है तो क्या हुआ, वर्दी तो है ना...।"
वर्दी में रील बनाना प्रतिबंधित
पुलिस मुख्यालय (PHQ) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि "वर्दी में रील बनाना या सोशल मीडिया पर निजी वीडियो पोस्ट करना प्रतिबंधित है", इन आरक्षकों ने यह वीडियो साझा किया। एसपी ने इसे पुलिस की गरिमा के खिलाफ और गंभीर अनुशासनहीनता माना है। एडीजी ट्रेनिंग राजाबाबू सिंह के अनुसार, यह वीडियो 15 फरवरी को सोशल मीडिया के 'मटियामेट ग्रुप' और अन्य प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया था।
इन्हें दिया गया नोटिस, पहले भी निलंबन जैसी कार्रवाई
अनिल कड़ोदिया (जिला देवास), आनंद कुलवरे (जिला इंदौर), प्रदीप यादव (जिला उज्जैन), राजकुमार सैंधव (जिला उज्जैन), गोनू सतबाछिया (जिला उज्जैन), सुरजीत गर्ग (जिला विदिशा)। पुलिस विभाग में वर्दी पहनकर रील बनाने पर पहले भी कई कर्मचारियों पर निलंबन जैसी कार्रवाई हो चुकी है। विभाग का मानना है कि इस तरह के कृत्यों से पुलिस की छवि धूमिल होती है।
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