साल 2025 में प्रदेश में साइबर अपराधियों ने लोगों से करीब 634 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने इनमें से केवल 137 करोड़ रुपये फ्रीज़ किए और 47 करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाए जा सके।
भोपाल। साल 2025 में प्रदेश में साइबर अपराधियों ने लोगों से करीब 634 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने इनमें से केवल 137 करोड़ रुपये फ्रीज़ किए और 47 करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाए जा सके। इस दौरान कुल 4,800 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन केवल 23 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।
ई-ज़ीरो FIR से पुलिस पर बढ़ेगा दबाव
अब ई-ज़ीरो एफआईआर सिस्टम लागू किया गया है, जो एक लाख रुपये से अधिक की साइबर वित्तीय ठगी के मामलों को कवर करता है। इससे पुलिस पर दबाव बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कई थानों में स्टाफ और साइबर विशेषज्ञों की कमी है। अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जबकि एफआईआर की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
पीड़ितों को राहत की उम्मीद
ई-ज़ीरो एफआईआर सिस्टम से पीड़ितों को राहत मिलने की संभावना है। अब शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से डिजिटल रूप से दर्ज की जा सकती हैं, जिससे थानों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हालांकि, जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा या नहीं, यह अभी देखा जाना बाकी है।
डिजिटल जागरूकता बेहद जरूरी
साइबर एसपी प्रणय नागवंशी ने बताया कि अक्सर पीड़ित देर से पुलिस और बैंक को सूचना देते हैं, जिससे वे मिनटों में अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा बैठते हैं। एफआईआर की कमी के कारण रिकवरी दर भी कम रहती है। उन्होंने बताया कि राज्य अब पीड़ितों को 47 करोड़ रुपये लौटाने के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर छठे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पहले यह 22वें स्थान पर था।
अंतरराज्यीय समन्वय की जरूरत, ‘गोल्डन ऑवर’ बेहद महत्वपूर्ण
अधिकांश साइबर अपराध अन्य राज्यों से संचालित होते हैं, जिससे जांच में समय और संसाधन अधिक लगते हैं। अधिकारियों ने राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया ताकि सूचना जल्दी मिल सके और पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके। साइबर ठगी के बाद पहले दो घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जाए तो पैसा ठगों तक पहुंचने से पहले फ्रीज़ किया जा सकता है। ई-ज़ीरो एफआईआर सिस्टम आईपी लॉग और ट्रांजैक्शन आईडी जैसे डिजिटल सबूतों को कानूनी रूप से सुरक्षित करता है, जिससे रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ती है।
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