पश्चिम बंगाल में फिर एक बीएलओ की आत्महत्या की घटना ने चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करने को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच घमासान शुरू है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में फिर एक बीएलओ की आत्महत्या की घटना ने चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करने को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच घमासान शुरू है। बाकुड़ा जिले में बीएलओ हाराधन मंडल (52) ने रानीबांध के तहत राजाकाटा ग्राम के प्राइमरी स्कूल में रस्सी से झूल कर आत्महत्या कर ली। उनके शव के पास उनके हाथ का लिखा सुसाइड नोट मिला, जिस पर लिखा हुआ है। उस नोट से खुलासा हुआ है कि उन्होंने काम के बोझ की वजह से आत्महत्या की है। इस घटना को लेकर इलाके में तनाव है। इस इलाके में 29 दिसंबर से एसआइआर की तहत वोटरों की सुनवाई हो रही है। सुनवाई के पहले ही हाराधन मंडल ने आत्महत्या कर ली। इसके पहले राज्य में दो बीएलओ के आत्महत्या करने की घटना हो चुकी है।
सुसाइड नोट में काम के बोझ का जिक्र
जिले के एसपी सौंम्यदीप भट्टाचार्य का कहना है कि मामले की जांच हो रही है उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लिखा है कि” काम के बोझ को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूं”। टीएमसी के नेता, स्थानीय विधायक सह राज्य के ममत्री ज्योत्सना मांडी ने घटनास्थल का मुआयना किया और परिवार को लोगों से मुलाकात की।
सांसद अभिषेक बनर्जी ने BLO की आत्महत्या के लिए चुनाव आयोग को ठहराया जिम्मेदार
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने हाराधन मंडल की आत्महत्या की घटना के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही चुनाव आयोग द्वारा हड़बड़ी में एसआइआर कराने का विरोध कर रही है। चुनाव आयोग एसआइआर दो साल के बदले दो महीने में करवा रहा है। बीएलओ पर काम का बोझ लादा गया है। एसआइआर के आंतक से इस राज्य में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। कई बीएलओ बीमार पड़ गए। दो बीएलओ की आत्महत्या की घटनाएं हो गई। इसके विपरीत भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच के बाद पता चलेगा कि हाराधन मंडल द्वारा आत्महत्या करने की घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या है।
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