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कूड़े के ढेर में मिले कई आधार कार्ड

क्या अब जरूरी नहीं आधार कार्ड, रायबरेली की इस घटना का क्या मतलब

Raebareli News: रायबरेली में तहसील गेट के ठीक सामने बड़ी संख्या में आधार कार्ड और कुछ जरूरी कागजों के ढेर मिले हैं.

क्या अब जरूरी नहीं आधार कार्ड रायबरेली की इस घटना का क्या मतलब

Adhaar Crad |

रायबरेली: उत्तर प्रदेश के रायबरेली से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने सरकारी सिस्टम की मुस्तैदी और दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं. शहर के सबसे व्यस्त और अति सुरक्षित माने जाने वाले तहसील गेट के ठीक सामने उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लोगों की नजर कूड़े के ढेर पर पड़ी. कूड़े के इस ढेर में कोई साधारण कचरा नहीं, बल्कि आम जनता की 'पहचान' यानी सैकड़ों की संख्या में असली आधार कार्ड लावारिस हालत में सड़ रहे थे. इस लापरवाही की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई.

गोपनीय दस्तावेज भी हुए बरामद 

हैरानी की बात यह है कि कूड़े के ढेर में सिर्फ आधार कार्ड ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में फाइनेंस से जुड़े जरूरी कागजात और अन्य गोपनीय दस्तावेज भी बिखरे पड़े मिले. स्थानीय लोगों के मुताबिक, ये तमाम आधार कार्ड राही ब्लॉक के रहने वाले ग्रामीणों के हैं. डिजिटल इंडिया के इस दौर में, जहां आधार कार्ड के बिना इंसान का राशन से लेकर बैंक खाता तक बंद हो जाता है, वहां सैकड़ों जरूरतमंदों के ये जरूरी दस्तावेज कचरे के डिब्बे की शोभा बढ़ा रहे थे.

कूड़े के ढेर में पड़े ये जरूरी कागज सिस्टम की पोल खोल रहे

सरकार कहती है कि आधार के बिना पत्ता भी नहीं हिलता, लेकिन रायबरेली में उसी आधार को सिस्टम ने कचरा समझकर फेंक दिया. आखिर इन गरीबों की गोपनीयता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का हक इस सिस्टम को किसने दिया? एक तरफ ग्रामीण अपने आधार कार्ड बनवाने और उन्हें पाने के लिए महीनों डाकखाने और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे इन कार्ड्स को रद्दी के भाव फेंक दिया गया. इस घटना ने डाक विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. जनता तक जो कार्ड सुरक्षित पहुंचने चाहिए थे, वे तहसील के मुख्य द्वार के सामने ही सिस्टम की पोल खोल रहे हैं.

प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप

सैकड़ों आधार कार्ड का इस तरह सरेआम कूड़े में मिलना महकमे की एक बहुत बड़ी चूक और संवेदनहीनता को दर्शाता है. जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में आधार कार्ड तहसील गेट तक कैसे पहुंचे? क्या इन्हें जानबूझकर यहां फेंका गया या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? जनता के भरोसे का कत्ल करने वाले इस लापरवाही के असली जिम्मेदार पर कब और क्या कार्रवाई होगी? फिलहाल, इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और हर कोई अपनी गर्दन बचाने में जुटा है. देखना होगा कि इस मामले में गाज किस पर गिरती है.

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