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सीतापुर में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा

महंगी किताबों और सामाजिक अनियमितताओं पर एबीवीपी ने विरोध जताया

परिषद ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन वृहद आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.

महंगी किताबों और  सामाजिक अनियमितताओं पर एबीवीपी ने विरोध जताया

जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते एबीवीपी के कार्यकर्ता |

सीतापुर (उत्तर प्रदेश) । सीतापुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने शैक्षिक एवं सामाजिक अनियमितताओं के विरोध में जिलाधिकारी को पांच सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए 10 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की. परिषद ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन वृहद आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.

उचित मूल्य पर पुस्तकें उपलब्ध कराएं

ज्ञापन में एबीवीपी ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा इंटर कॉलेजों में एनसीईआरटी पैटर्न का पाठ्यक्रम लागू किए जाने के बावजूद कई विद्यालय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें छात्रों पर थोप रहे हैं. संगठन ने मांग की कि जिले के सभी विद्यालयों में शासन द्वारा निर्धारित एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू कराया जाए. साथ ही सभी पुस्तक विक्रेताओं को सरकारी निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं, ताकि छात्रों को उचित मूल्य पर पुस्तकें मिल सकें. परिषद ने नेहरू युवा केंद्र सीतापुर में युवा स्वयंसेवक भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है तथा साक्षात्कार, चयन मानकों और प्राप्त अंकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है. इससे अभ्यर्थियों में असंतोष और पक्षपात की आशंका बढ़ रही है.

बेसमेंट में चल रहे कोचिंग संस्थानों की जांच की मांग

इसके अलावा एबीवीपी ने जिले में बिना मान्यता संचालित विद्यालयों और बेसमेंट में चल रही कोचिंग संस्थाओं की जांच कर दोषी संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की. संगठन ने लालबाग शहीद पार्क स्थित महिला शौचालय को बाजार में कार्यरत महिलाओं एवं छात्राओं के लिए निशुल्क करने तथा वहां नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित कराने की भी मांग उठाई. ज्ञापन सौंपने के दौरान एबीवीपी पदाधिकारियों ने कहा कि छात्र हित और समाजहित से जुड़े इन मुद्दों पर प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर संगठन लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेगा.

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