लगभग 7 साल के लंबे और कष्टदायी इंतजार के बाद, बालाघाट का बेटा प्रसन्नजीत रंगारी पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अपने घर वापस लौट आया है।
बालाघाट। लगभग 7 साल के लंबे और कष्टदायी इंतजार के बाद, बालाघाट का बेटा प्रसन्नजीत रंगारी पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अपने घर वापस लौट आया है। लेकिन इस वापसी की कीमत परिवार ने बहुत भारी चुकाई है। प्रसन्नजीत के पिता, लोपचंद रंगारी ने अपने बेटे की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया। विडंबना यह रही कि जिस दिन पाकिस्तान से प्रसन्नजीत की पहचान की पुष्टि के आधिकारिक दस्तावेज भारत पहुंचे, उसी दिन उसके पिता का देहांत हो गया।
मां की याददाश्त हुई गुम
अपने जवान बेटे के खो जाने के गम और सालों के इंतजार ने मां को इस कदर तोड़ा कि उन्होंने अपनी याददाश्त (होश-हवास) खो दी है। जब प्रसन्नजीत घर लौटा, तो उसकी मां उसे पहचान भी नहीं पाईं। प्रसन्नजीत की बहन, संघमित्रा खोब्रागढ़े, इस पूरी लड़ाई का चेहरा रहीं। उन्होंने अपने भाई को वापस लाने के लिए प्रशासन से लेकर सरकार तक हर दरवाजा खटखटाया। भाई को सामने देखकर वे फूट-फूट कर रो पड़ीं और कहा, "खुशी तो है कि भाई आ गया, लेकिन इस बीच हमने सब कुछ खो दिया।"
प्रसन्नजीत ने की थी बी-फार्मा की पढ़ाई
प्रसन्नजीत ने जबलपुर से बी. फार्मा (B.Pharm) की पढ़ाई की थी, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य खराब होने (डिप्रेशन) के कारण वह भटक गया था। साल 2017-18 में वह घर से लापता हुआ और गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया। पाकिस्तान में उसे 'सुनील अदे' के फर्जी नाम से जेल में रखा गया था।
अभी क्या है स्थिति
31 जनवरी 2026 को पाकिस्तान द्वारा रिहा किए गए 7 भारतीय कैदियों में प्रसन्नजीत का नाम भी शामिल था। वह अमृतसर के रास्ते वापस बालाघाट पहुँचा। हालांकि वह घर तो आ गया है, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति अब भी काफी नाजुक है और वह बहुत कुछ भूल चुका है। परिवार ने अब सरकार से उसके बेहतर इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है।
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