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प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले अखिलेश यादव

'एसआईआर सोची समझी साजिश है...', प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले अखिलेश यादव

UP News : अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा कि ये (एसआईआर) सोची समझी साजिश है, रणनीति है.

एसआईआर सोची समझी साजिश है प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले अखिलेश यादव

'एसआईआर सोची समझी साजिश है...', प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले अखिलेश यादव |

UP News : अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा कि ये (एसआईआर) सोची समझी साजिश है, रणनीति है. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के दिए हुए संविधान के तहत हमें जो वोट डालने का अधिकार है.  उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में BLO और SIR को लेकर बात की. 

अखिलेश यादव ने कहा कि उस अधिकार को छीनने की तैयारी है. एक अधिकारी ने कहा कि वह पहले से कार्यमुक्त थे, जब 14 तारीख को कार्य किया तो कार्यमुक्त कैसे हो गए? प्रशासन की तरफ से कोई मदद भी नहीं मिली और झूठा आरोप लगा रहे हैं.

 

उन्होंने कहा कि अभी इस परिवार को पार्टी की तरफ से दो लाख रुपये दे रहे हैं. हमारी मांग है कि एक करोड़ रुपये इस परिवार को मदद की जाए और सरकारी नौकरी के अलावा तमाम सरकारी योजनाओं से इन्‍हें जोड़ा जाए.

BLO पर अखिलेश यादव क्या बोले?

अखिलेश यादव ने कहा कि ड्यूटी पर रहने के दौरान बीएलओ की मौत हुई, लेकिन अधिकारी दबाव बनाते हैं और यह साजिश रची जा रही है कि वह ड्यूटी पर नहीं थे. जिस स्कूल में वह शिक्षा मित्र थे, उस पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वे पहले से बीमार थे. सपा की पहले दिन से मांग है कि पहले तो इस तरह काम का दबाव न बनाया जाए, क्योंकि यह बहुत जिम्मेदारी और सावधानी का काम है और बहुत संवेदनशील कार्य है. एक बार फॉर्म खारिज हो गया और वोट आपका नहीं बना तो पूरे कागजात के साथ घूमना पड़ेगा.

 

उन्होंने कहा कि यह एसआईआर है, आखिर बीजेपी इतनी जल्दबाजी में क्यों है? चुनाव आयोग और बीजेपी मिले हुए हैं और दोनों जल्दबाजी कर रहे हैं. पहले भी मैं यह बात कह चुका हूं कि उत्तर प्रदेश में लगातार शादियां हो रही हैं और शादियों के समय में लोगों को एक-दूसरे के यहां आना जाना, तैयारी करना होता और सब व्यस्त हैं.

 

अखिलेश यादव ने कहा कि इतने कम समय में पूरे प्रदेश का एसआईआर कराने की क्‍या आवश्‍यकता है? यहां तक कि जिम्मेदारी नगर पालिका के सफाईकर्मियों को भी दी गई है. फॉर्म में इतनी तकनीकी बातें हैं और बीएलओ का सहायक सफाई कर्मचारी को बनाया गया है और इस फॉर्म को बंटवाने में की जाने वाली जल्दबाजी, बंटा नहीं बंटा, लेकिन जो सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि सभी फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है.

 

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