इटावा में एक छात्रा को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया, जबकि वह अधिकारियों के सामने अपने जीवित होने का सबूत दे रही है।
इटावा: "देखिए साहब, मैं जिंदा हूं", यह गुहार लेकर एक छात्रा अधिकारियों के चक्कर काट रही है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में छात्रा को मृत दिखा दिया गया है, जबकि वह अधिकारियों के सामने खड़े होकर अपने जिंदा होने का सबूत दे रही है। मामला इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के विचारपुरा गांव का है।
कुछ महीने पहले राशन कार्ड को अपात्र बताकर काट दिया नाम
विचारपुरा निवासी छात्रा कीर्ति अपने भाई श्रीकांत के साथ राशन कार्ड से जुड़ी समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट और जिला पूर्ति विभाग के चक्कर काट रही है। छात्रा के मुताबिक, उसकी मां के नाम से पहले से राशन कार्ड बना हुआ था, लेकिन कुछ माह पहले कार्ड को अपात्र बताकर उसका नाम काट दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि नाम काटने का स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया।
जनसेवा केंद्र पहुंचकर पता चली हकीकत
इसके बाद जब कीर्ति अपने भाई के साथ नया राशन कार्ड बनवाने जनसेवा केंद्र पहुंची तो वहां ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर दोनों के होश उड़ गए। छात्रा को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाया जा रहा था। छात्रा का कहना है कि वह जीवित है, फिर सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत कैसे दर्ज कर दिया गया? पीड़िता और उसके भाई ने आरोप लगाया कि गांव के प्रधान की कथित मिलीभगत से राशन डीलर के माध्यम से उनका नाम कटवाकर किसी दूसरे व्यक्ति का राशन कार्ड बनवा दिया गया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
विभागीय स्तर पर नहीं मिला संतोषजनक जवाब
विभागीय स्तर पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर भाई-बहन ने जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने संबंधित विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि जिंदा छात्रा को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज करने की यह बड़ी चूक आखिर किस स्तर पर हुई।
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