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अमित शाह का सफर: चुनावी रणनीति से गृह मंत्री तक

अमित शाह: BJP के चुनावी रणनीतिकार से गृह मंत्री तक का सफर, आर्टिकल 370 से नक्सलवाद के खात्मे तक बड़े फैसले

ब्यूरोक्रेटिक और राजनीतिक हलकों में मजबूत इरादों वाले नेता के रूप में पहचाने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं।

 अमित शाह bjp के चुनावी रणनीतिकार से गृह मंत्री तक का सफर आर्टिकल 370 से नक्सलवाद के खात्मे तक बड़े फैसले

Amit Shah: From BJP Strategist to Home Minister |

नई दिल्ली: ब्यूरोक्रेटिक और राजनीतिक हलकों में मजबूत इरादों वाले नेता के रूप में पहचाने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। वर्ष 2014 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से उन्होंने देशभर में पार्टी के राजनीतिक विस्तार में अहम भूमिका निभाई। पिछले 12 वर्षों में वह भारतीय राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में शामिल हुए हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में गृह मंत्री बनने के बाद शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद से निपटने, आपराधिक कानूनों में बदलाव और नक्सलवाद के खिलाफ अभियान जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया। उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों ने देश की राजनीति और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर व्यापक प्रभाव डाला है।

RSS और ABVP से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

22 अक्टूबर, 1964 को गुजरात में कुसुमबेन और अनिलचंद्र शाह के घर जन्मे अमित शाह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़कर की। बाद में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सक्रिय सदस्य बने। जमीनी स्तर पर संगठन के लिए काम करते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में अपनी पहचान बनाई। उनकी संगठनात्मक क्षमता और चुनावी रणनीति के कारण उन्हें कई बड़े नेताओं के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 1991 में लालकृष्ण आडवाणी और 1996 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के गांधीनगर संसदीय क्षेत्र के चुनाव अभियानों में भी उन्होंने भूमिका निभाई।

उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी से राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पहचान

वर्ष 2013 में अमित शाह को बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक सफलता में उनकी चुनावी रणनीति को अहम माना गया। जुलाई 2014 में उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों में अपना संगठन मजबूत किया और चुनावी विस्तार किया। मई 2018 तक बीजेपी और उसके सहयोगी दल 21 राज्यों में सरकार का हिस्सा थे। उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान पार्टी की सदस्यता भी 10 करोड़ से अधिक बताई गई थी। 1 जून, 2019 को अमित शाह ने नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय गृह मंत्री का पद संभाला। इसके करीब दो महीने बाद, अगस्त 2019 में, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त करने का फैसला लिया। इसके साथ ही तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। सरकार ने इस कदम को राष्ट्रीय एकीकरण, विकास और सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, इस फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर व्यापक बहस भी हुई।

नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने की दिशा में कदम

शाह के कार्यकाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 भी एक प्रमुख कानून रहा। संसद ने दिसंबर 2019 में इसे पारित किया था। इस कानून के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के पात्र हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई प्रवासियों को निर्धारित शर्तों के अधीन भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का तेज रास्ता दिया गया। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में इस कानून को लागू करने के नियम अधिसूचित किए। आपराधिक न्याय प्रणाली में बदलाव के लिए केंद्र सरकार ने तीन नए कानून लागू किए। इनमें भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम शामिल हैं। इन कानूनों ने क्रमशः भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली। ये 1 जुलाई, 2024 से लागू हुए, हालांकि कुछ प्रावधानों में विशेष अपवाद रखे गए। सरकार के अनुसार, इन कानूनों का उद्देश्य आपराधिक न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाना, तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है।

जेल प्रशासन और फोरेंसिक जांच को आधुनिक बनाने पर जोर

अमित शाह के कार्यकाल में जेल प्रशासन में सुधार के लिए मॉडल प्रिजन्स एक्ट, 2023 तैयार किया गया। इसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेल प्रबंधन आधुनिक बनाने के लिए एक रूपरेखा उपलब्ध कराना था। इसे अपनाना संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर निर्भर करता है। इसके अलावा, सरकार ने आपराधिक मामलों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया। नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के विस्तार और फोरेंसिक शिक्षा को मजबूत करने के प्रयास इसी दिशा का हिस्सा हैं। नए आपराधिक कानूनों में भी गंभीर अपराधों की जांच के दौरान फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर अधिक जोर दिया गया है। हालांकि, इन उपायों का प्रभाव राज्यों में उपलब्ध संसाधनों, प्रशिक्षित कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा।

आतंकवाद के खिलाफ अभियान और PFI पर प्रतिबंध

आतंकवाद से निपटना गृह मंत्री के कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़े संगठनों को पांच साल के लिए गैरकानूनी घोषित किया था। वर्ष 2019 में UAPA और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम में भी संशोधन किए गए। इन बदलावों के तहत आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानूनी प्रावधानों और जांच एजेंसियों की शक्तियों का दायरा बढ़ाया गया। इसके साथ ही आतंकवादी नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और देश से फरार आरोपियों की वापसी के लिए केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच समन्वय पर जोर दिया गया।

पूर्वोत्तर में शांति समझौतों से उग्रवाद पर लगाम लगाने की कोशिश

पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद और लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाना भी गृह मंत्रालय के एजेंडे का हिस्सा रहा है। अमित शाह के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने विभिन्न उग्रवादी संगठनों और समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ कई शांति समझौते किए। इनका उद्देश्य हिंसा कम करना, हथियार छोड़ने वाले कैडर के पुनर्वास में मदद करना और राजनीतिक तथा विकास संबंधी मांगों के समाधान का रास्ता निकालना रहा है। सरकार ने इन प्रयासों को सुरक्षा अभियानों, बातचीत और विकास को एक साथ आगे बढ़ाने वाली रणनीति का हिस्सा बताया है।

31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य

वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अमित शाह की सुरक्षा रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। गृह मंत्रालय ने सुरक्षा अभियान, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, बुनियादी ढांचे के विकास और प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच बढ़ाने जैसे कदमों पर जोर दिया। सुरक्षा बलों ने दूरदराज के इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने और माओवादी संगठनों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए अभियान चलाए। अमित शाह ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए 31 मार्च, 2026 की समयसीमा तय की थी। दिए गए विवरण के अनुसार, सरकार ने दावा किया कि यह लक्ष्य हासिल कर लिया गया। हालांकि, नक्सलवाद के पूरी तरह समाप्त होने के दावे का आकलन स्वतंत्र रूप से सुरक्षा संबंधी आंकड़ों और जमीनी स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।

ड्रग तस्करी और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कार्रवाई

गृह मंत्रालय ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान तेज करने पर भी ध्यान दिया है। सरकार ने दिसंबर 2029 तक इस समस्या से जुड़े नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इस रणनीति में तस्करों और वितरकों की जांच के साथ-साथ वित्तीय नेटवर्क, अंतरराज्यीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय तस्करी मार्गों की पहचान करना शामिल है। गंभीर अपराधों के आरोपियों के विदेश भागने के मामलों में भी NIA और अन्य एजेंसियां इंटरपोल तथा विदेशी कानून प्रवर्तन संस्थाओं के साथ समन्वय करती हैं। ऐसी कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग व्यवस्थाओं के तहत की जाती है।

स्मार्ट बॉर्डर सिस्टम और घुसपैठ रोकने पर जोर

सीमा सुरक्षा को मजबूत करना भी अमित शाह की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। सरकार की प्रस्तावित रणनीति में निगरानी तकनीक, खुफिया जानकारी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), सेना, स्थानीय प्रशासन तथा सीमावर्ती समुदायों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य सीमा पर निगरानी मजबूत करना, घुसपैठ रोकना और सीमा पार से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है।  इसके अलावा, केंद्र सरकार ने कथित अवैध घुसपैठ से जुड़े मामलों में दस्तावेजों, संदिग्ध गतिविधियों और वित्तीय नेटवर्क की जांच पर भी जोर दिया है। ऐसी कार्रवाई लागू कानूनों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत की जाती है। जून 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने पर अमित शाह एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री बने। उन्हें सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जिसका प्रभार वह 2021 से संभाल रहे हैं। उनके राजनीतिक और प्रशासनिक सफर में चुनावी रणनीति, बड़े संवैधानिक और कानूनी बदलाव, आतंकवाद के खिलाफ अभियान, पूर्वोत्तर में शांति प्रयास और आंतरिक सुरक्षा को आधुनिक बनाने की पहल प्रमुख रही हैं। गुजरात में एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत करने से लेकर केंद्र सरकार में गृह मंत्री की भूमिका तक, अमित शाह का सफर भारतीय राजनीति में संगठनात्मक रणनीति और आंतरिक सुरक्षा के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

(ANI)

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