बढ़ते तापमान और भीषण लू के बीच उत्तर प्रदेश के संभल जिले में कुत्ते और बंदरों के काटने के मामलों में अचानक वृद्धि देखी गई है।
संभल (उत्तर प्रदेश)। बढ़ते तापमान और भीषण लू के बीच उत्तर प्रदेश के संभल जिले में कुत्ते और बंदरों के काटने के मामलों में अचानक वृद्धि देखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आवारा पशुओं में बढ़ती आक्रामकता इसका कारण है।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या, गर्मी से जानवरों में बढ़ रही बेचैनी
जिला संयुक्त अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मई के पहले 20 दिनों में अस्पताल में बड़ी संख्या में पीड़ितों का इलाज किया गया है। उन्होंने बताया, "1 मई से 20 मई तक बंदरों और कुत्तों सहित 165 रोगियों का इलाज किया गया है और 305 खुराकें दी गई हैं, जिनमें एंटीसेरम की 20 खुराकें शामिल हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं में बेचैनी और आक्रामक व्यवहार बढ़ रहा है। इससे आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाएं बढ़ रही हैं। बचाव के उपायों में पशुओं से दूर रहना और सुरक्षा के लिए लाठी लेकर चलना शामिल है। हमने नगर निगम को अस्पताल में देखे गए कुत्तों को पकड़ने के लिए पत्र लिखा है।"
सार्वजनिक जगहों पर आवारा जानवरों का खतरा
यह घटनाक्रम जिले में बार-बार होने वाली पशु काटने की घटनाओं को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार जिला संयुक्त अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 15 से 25 मरीज इलाज और रेबीज रोधी टीकाकरण के लिए आ रहे हैं। नगर निगम की निरंतर कार्रवाई के बावजूद अस्पताल परिसर सहित सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों और बंदरों की बढ़ती उपस्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है।
नसबंदी और पकड़ने के अभियान जारी
संभल नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी मणि भूषण तिवारी ने कहा कि नसबंदी अभियान, चारागाह क्षेत्र और कुत्ते पकड़ने के अभियानों के माध्यम से आवारा पशुओं की आबादी को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि ये अभियान पशुपालन विभाग के समन्वय से चलाए गए। हालांकि वर्तमान में एबीसी (पशु जन्म नियंत्रण) केंद्र की कोई व्यवस्था नहीं है। इसे स्थापित करने की प्रक्रिया जारी हैं। एक बार चालू हो जाने पर एबीसी केंद्र के माध्यम से अधिक व्यवस्थित और व्यापक कार्रवाई करने में आसानी होगी।
आक्रामक जानवरों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
तिवारी ने आगे कहा, "नगरपालिका क्षेत्र के भीतर जहां भी शिकायतें प्राप्त होती हैं, वहां एक नामित समिति भेजी जाती है। हमने इस उद्देश्य के लिए 10 कर्मियों की एक टीम गठित की है। टीम विशिष्ट स्थानों का दौरा करती है और कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाती है।" संभल जिला मजिस्ट्रेट अंकित खंडेलवाल ने कहा कि प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत काम कर रहा है और जहां आवश्यक होगा वहां सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा "हमें सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट निर्देश मिले हैं। अब हमें आक्रामक कुत्तों और लाइलाज बीमारियों से पीड़ित कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है, जिसमें जरूरत पड़ने पर उन्हें मारना भी शामिल है। पहला कदम इन जानवरों के बारे में व्यापक जानकारी जुटाना होगा।"
शहर और गांवों में होगा सर्वे
खंडेलवाल ने आगे बताया कि प्रशासन सबसे पहले शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आक्रामक और खतरनाक जानवरों का विस्तृत आकलन करेगा। उन्होंने कहा, "हम अपने शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे जानवरों की संख्या का आकलन करेंगे जो खतरनाक या आक्रामक स्वभाव के हैं और जिनकी मौजूदगी स्थानीय समुदाय के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। इस आकलन और बाद की जांच के आधार पर हम आवश्यक कदम उठाएंगे। इसके अलावा, हम शहर के हर कोने में सीमित क्षमता वाले आश्रय गृह स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह व्यवस्था सुचारू रूप से और कुशलता से चलती रहे।" (एएनआई)
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