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रतलाम के गोरठा माता मंदिर की प्रसिद्ध भविष्यवाणी

गोठड़ा माता मंदिर में वार्षिक भविष्यवाणी, किसानों और राजनीति पर पड़ेंगे असर

जिले के जावरा तहसील में स्थित महिषासुर मर्दिनी गोठड़ा माताजी मंदिर की प्रसिद्ध वार्षिक भविष्यवाणी चैत्र नवरात्रि की नवमी को की गई।

गोठड़ा माता मंदिर में वार्षिक भविष्यवाणी किसानों और राजनीति पर पड़ेंगे असर

Annual Forecast at Gothda Mataji Temple Highlights Farming and Weather |

रतलाम। जिले के जावरा तहसील में स्थित महिषासुर मर्दिनी गोठड़ा माताजी मंदिर की प्रसिद्ध वार्षिक भविष्यवाणी चैत्र नवरात्रि की नवमी को की गई। हजारों किसानों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पंडा नागूलाल चौधरी ने आने वाले वर्ष के लिए मौसम, खेती और राजनीति से जुड़ी भविष्यवाणियां कीं।

तीन बार बोवनी के योग

भविष्यवाणी के अनुसार, इस वर्ष किसानों को फसल की बुवाई (बोवनी) के लिए तीन बार प्रयास करने पड़ सकते हैं। इसका अर्थ है कि शुरुआत में मौसम की अनिश्चितता बनी रह सकती है। किसानों के लिए राहत की बात यह है कि इस साल अनाज और अन्य फसलों के दाम अच्छे मिलने की उम्मीद जताई गई है। विशेष रूप से लहसुन और अन्य नकदी फसलों के भाव में तेजी रहने के संकेत दिए गए हैं।

अग्नि और हवा का प्रकोप रहेगा

इस साल गर्मी का असर तेज रहेगा और आगजनी (अग्नि प्रकोप) तथा तेज हवाओं की घटनाएं अधिक हो सकती हैं। आमतौर पर सूखे रहने वाले वैशाख माह में भी वर्षा होने के योग हैं। ज्येष्ठ माह की शुरुआत में बारिश कम रहेगी, लेकिन अंत तक इसमें तेजी आएगी। सावन और भादों के महीनों में कहीं खंडित वर्षा (कहीं कम, कहीं ज्यादा) तो कहीं अतिवृष्टि की संभावना है।

राजनीतिक उथल-पुथल रहेगी

भविष्यवाणी में कहा गया है कि राजनीतिक क्षेत्र में इस वर्ष काफी उठापटक और उथल-पुथल देखने को मिलेगी। सत्ता गलियारों में समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि उथल-पुथल होगी, लेकिन कुछ रिपोर्टों के अनुसार 'राजा' (नेतृत्व) के स्थिर रहने के संकेत भी दिए गए हैं।

प्राकृतिक आपदा से बढ़ेगी परेशानी

साल के उत्तरार्ध (नवंबर-जनवरी के आसपास) में भूकंप के हल्के झटके या अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी दी गई है। पंडा जी ने गौ-रक्षा और धर्म के मार्ग पर चलने पर जोर दिया है ताकि आने वाले संकटों का प्रभाव कम हो सके। गोठड़ा माता की यह भविष्यवाणी मालवा क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी के आधार पर कई किसान अपनी साल भर की खेती की रणनीति तैयार करते हैं।

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