NEET-UG पेपर लीक मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की ओर से पेश वकील एपी सिंह ने सोमवार को दावा किया कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ बिल्कुल भी कोई सबूत नहीं है।
नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की ओर से पेश वकील एपी सिंह ने सोमवार को दावा किया कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ "बिल्कुल भी कोई सबूत नहीं" है। उन्होंने कहा कि इस मामले से उन्हें जोड़ने वाली कोई बरामदगी, धन का लेन-देन, कॉल डिटेल्स, तस्वीरें या वीडियोग्राफी मौजूद नहीं है।
वकील बोले- हमारे मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष
ANI से बातचीत में एपी सिंह ने कहा, "दिनेश बिवाल और विकास बिवाल पूरी तरह निर्दोष हैं। अगली सुनवाई 3 अगस्त को होनी है। हम अभी शुरुआती चरण में हैं, ठीक वैसे ही जैसे निर्भया मामले में त्वरित अदालती कार्यवाही की शुरुआत हुई थी। हमने उस मामले में जल्दबाजी के परिणाम देखे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। कोई बरामदगी नहीं हुई है और कोई सबूत नहीं है। हमने पुलिस हिरासत रिमांड की कार्यवाही में भाग लिया। कोई धन का लेन-देन नहीं है, कोई कॉल डिटेल्स नहीं हैं, कोई तस्वीरें नहीं हैं और कोई वीडियोग्राफी नहीं है। उनके खिलाफ किसी भी तरह का कोई सबूत बिल्कुल नहीं है।"
CBI की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
सिंह ने आरोप लगाया कि अधिकारियों के पास पेपर लीक और उसके परिवहन में शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, लेकिन उनके मुवक्किलों को सीबीआई द्वारा जांच अपने हाथ में लेने के बाद गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा, "एनटीए ने 47 लोगों को निलंबित किया। बाद में पेपर लीक और उसके परिवहन में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनके खिलाफ अधिकारियों के पास सभी सबूत और विवरण हैं। वही असली दोषी हैं। जैसे ही सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली, उन्होंने तीनों को उठाकर जेल में डाल दिया।"
फास्ट ट्रैक कोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी
नए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए एपी सिंह ने कहा कि जन दबाव के बीच बनाए गए कानूनों में अक्सर जल्दबाजी होती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, "भारत सरकार द्वारा लागू नई प्रणाली, प्रक्रिया और कानूनों के तहत नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। लेकिन जब भी विरोध प्रदर्शन, जन दबाव, जंतर-मंतर पर धरने या संसदीय हंगामे के बाद कानून बनाए जाते हैं, तो जल्दबाजी हो जाती है। ऐसी जल्दबाजी न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुंचा सकती है।" उन्होंने यह भी कहा कि "'सभी के लिए न्याय का अधिकार' और 'जमानत नियम है, जेल अपवाद' जैसे सिद्धांतों की अनदेखी की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति जमानत की सभी शर्तें पूरी करता है, तो उसे जमानत मिलनी चाहिए।"
3 अगस्त तक टली जमानत याचिका पर सुनवाई
इससे पहले सोमवार को राउज़ एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने संबंधित अभियोजन निदेशक को NEET-UG पेपर लीक मामले में राज्य (CBI) की ओर से पैरवी के लिए अभियोजक नियुक्त करने का निर्देश दिया। विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा ने सीबीआई की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित न होने के कारण दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
13 आरोपियों में शामिल हैं दिनेश और विकास बिवाल
दिनेश बिवाल और विकास बिवाल उन 13 आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें सीबीआई ने परीक्षा की निर्धारित तिथि से पहले NEET-UG प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में हैं। 12 मई 2026 को एक सरकारी अधिकारी की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
CBI ने क्या लगाए हैं आरोप?
सीबीआई का आरोप है कि मंगिलाल बिवाल ने अपने बेटे विकास बिवाल के लिए NEET प्रश्नपत्र हासिल करने के उद्देश्य से शुभम खैरनार से संपर्क किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र मंगिलाल बिवाल के मोबाइल फोन से बरामद किए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि मंगिलाल ने यश यादव से 10 लाख रुपये में लीक हुआ प्रश्नपत्र खरीदा था। पूछताछ के दौरान विकास बिवाल ने बताया कि राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान उसकी मुलाकात यश यादव से हुई थी। सीबीआई के अनुसार, शुभम खैरनार ने सबसे पहले यश यादव को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया। इसके बाद यश ने मंगिलाल को, मंगिलाल ने विकास को और अंत में विकास ने दिनेश बिवाल को प्रश्नपत्र पहुंचाया। एजेंसी का यह भी आरोप है कि मंगिलाल ने लीक हुए प्रश्नपत्र को विभिन्न उम्मीदवारों को 12 लाख रुपये में बेचा।
अदालत ने यश यादव को दी थी विशेष अनुमति
इस मामले में आरोपी यश यादव को अदालत ने 21 जून को आयोजित NEET-UG परीक्षा में शामिल होने और 22 जून को अपनी बहन की शादी में न्यायिक हिरासत के बीच शामिल होने की अनुमति दी थी।
ANI
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