धार। यहां की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने विगत कुछ समय पहले हाईकोर्ट में...
भोजशाला में ASI के चौकाने वाले खुलासा, शिलालेख पर परमार राजाओं का इतिहास मिला
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धार। यहां की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने विगत कुछ समय पहले हाईकोर्ट में पेश सर्वे रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले खुलासे किये हैं।
भोजशाला सर्वे रिपोर्ट
सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला में 106 पिलर और प्राचीन स्थापत्य हैं। परिसर में कुल 106 स्तंभ (Pillars) पाए गए हैं। इन पिलर पर अलग-अलग तरह की नक्काशी और डिजाइन हैं। ये स्तंभ मूल रूप से एक पुराने मंदिर के हिस्से थे, जिन्हें बाद में मस्जिद के निर्माण के लिए पुनः उपयोग (Reuse) किया गया।
32 शिलालेख और परमार राजाओं का इतिहास
परिसर में 32 शिलालेख (Inscriptions) मिले हैं, जो 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच के हैं। ये शिलालेख परमार वंश के राजाओं (जैसे राजा भोज और राजा नरवर्मन) के गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हैं।
शिलालेख पर संस्कृत और प्राकृत भाषा में नाटक मिले
शिलालेखों पर संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे गए नाटकों के अंश मिले हैं। इनमें से एक प्रमुख नाटक 'पारिजात मंजरी' है, जिसे परमार राजा अर्जुनवर्मन के राजगुरु मदन ने लिखा था। शिलालेखों पर अंकित छंद और व्याकरण के नियम यह सिद्ध करते हैं कि यह स्थान एक समय में महान शैक्षणिक केंद्र (विद्यापीठ) था।
मुस्लिम शासन का जिक्र
रिपोर्ट में बाद के कालखंड (14वीं शताब्दी के बाद) के अरबी और फारसी शिलालेखों का भी उल्लेख है, जो मुस्लिम शासन के दौरान संरचना में किए गए बदलावों और वहां के इतिहास को दर्ज करते हैं।
'ॐ नमः शिवाय' जैसे धार्मिक चिन्ह
ASI की 2000 से अधिक पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान मस्जिद का निर्माण प्राचीन मंदिर के अवशेषों से किया गया था। परिसर के नीचे एक विशाल प्राचीन संरचना के प्रमाण मिले हैं, जो परमार काल की है। स्तंभों और दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां और 'ॐ नमः शिवाय' जैसे धार्मिक चिन्ह पाए गए हैं।
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