UP News : केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दिये जाने की पहल के क्रम में यूपी की योगी सरकार छोटे-मोटे ऑपरेशन..
UP News : केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दिये जाने की पहल के क्रम में यूपी की योगी सरकार छोटे-मोटे ऑपरेशन के लिए आयुर्वेद के चिकित्सकों को इसकी अनुमति देने पर विचार कर रही है। इस संबध में नियमों में बदलाव के बाद जल्द ही आयुर्वेदिक चिकित्सकों को बवासीर, फोड़ा-फुंसी और नाक, कान, गले से जुड़ी सर्जरी और टांका लगाने की अनुमति मिल सकेगी। साथ ही सामान्य सर्जरी के मरीजों को आयुर्वेदिक अस्पतालों में उपचार मिल सकेगा। इससे एलोपैधिक अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ से राहत मिल सकेगी।
भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद ने शल्य और शल्यक के स्नातकोत्तर छात्रों को विशिष्ट शल्य चिकित्सा की अनुमति देने के लिए भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक शिक्षा) विनियम, 2016 में संशोधन किया है। इसके तहत शल्य तंत्र (सामान्य शल्य चिकित्सा) और शल्यक (आंख, नाक, गला, सिर और दंत चिकित्सा) में स्नातकोत्तर शिक्षा लेने वाले छात्र इस विधा में सर्जरी कर सकेंगे। इसके बाद 2020 में इसमें संशोधन किया गया। इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। ऐसे में अब सभी राज्यों को सर्जरी के लिए अनुमति देनी है। इस व्यवस्था को आंध्र प्रदेश में लागू किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, राजकीय एवं निजी आयुर्वेद कॉलेजों में इन दोनों विषयों में परास्नातक कोर्स कराया जाता है। इसे देखते हुए आयुष विभाग परास्नातक डिग्रीधारी आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति मिल सके, इसके लिए नए सिरे से गाइडलाइन तैयार कर रहा है। इसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जा सकेगा। हालांकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन इसका विरोध कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक नई गाइडलाइन में यह प्रावधान किया जा रहा है कि आयुर्वेद परास्नातक डिग्रीधारी माह तक एलोपैथी चिकित्सालयों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। इससे आयुर्वेद के डॉक्टर आपात स्थिति में प्रबंधन, एलोपैथों से होने वाली सर्जरी में बरती जाने वाली सावधानियां जान सकेंगे।
प्रमुख सचिव आयुष, रंजन कुमार ने इस संबध में बताया कि आयुष चिकित्सकों को माइनर आपरेशन की अनुमति दिये जाने को लेकर नए सिरे से नियमावली तैयार कराई जा रही है। अन्य राज्यों में शुरू की गई व्यवस्था का भी आकलन किया जा रहा है। आयुर्वेद में सर्जरी पढ़ाई जाती है। सर्जरी की अनुमति मिलने से मरीजों को फायदा होगा। आयुर्वेद अस्पतालों में इसके लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
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