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मरीज खाली हाथ लौटने को मजबूर

डॉक्टरों की कमी और दवा संकट से जूझ रहे रायबरेली के आयुर्वेदिक अस्पताल

रायबरेली का आयुर्वेदिक अस्पताल डॉक्टरों की कमी और दवाओं के संकट से जूझ रहा है, जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

डॉक्टरों की कमी और दवा संकट से जूझ रहे रायबरेली के आयुर्वेदिक अस्पताल

Ayurvedic Hospital in Raebareli Faces Doctor Shortage and Medicine Crisis |

रायबरेली,(उत्तर प्रदेश)। जिले में संचालित आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आ गई है। प्रशासनिक उपेक्षा और विभागीय लापरवाही के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल खुद बीमार चल रहे हैं। कहीं अस्पतालों के पास अपना खुद का भवन नहीं है, तो कहीं डॉक्टर और कर्मचारियों की कमी के कारण ताले लटके हुए हैं। नतीजा यह है, कि सुदूर ग्रामीण अंचलों से आने वाले गरीब और लाचार मरीजों को समुचित इलाज और दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है या फिर महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

अस्पताल की स्थिति बेहद चिंताजनक

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 53 आयुर्वेदिक अस्पताल स्वीकृत हैं। कागजों पर तो इन अस्पतालों के जरिए जनता को बेहतर स्वास्थ्य लाभ देने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। इन 53 अस्पतालों में वर्तमान समय में केवल 43 डॉक्टर ही तैनात हैं। इनमें से कई डॉक्टर लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं, जिसके कारण अधिकांश अस्पतालों का कार्यभार अतिरिक्त प्रभार (सिंगल हैंड) के भरोसे चल रहा है। केवल डॉक्टरों की ही नहीं, बल्कि फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की स्थिति भी बेहद खराब है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अधिकांश पद रिक्त पड़े हैं, जिससे अस्पतालों की साफ-सफाई और बुनियादी व्यवस्थाएं ठप हैं।

दवाओं की भारी किल्लत, बजट होने पर भी खाली हाथ

अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के साथ-साथ दवाओं का भी भारी अकाल है। शासन स्तर से दवाओं के लिए बजट स्वीकृत होने की बात तो कही जा रही है, लेकिन हकीकत में अस्पतालों के पास मरीजों को देने के लिए बुनियादी दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों का आरोप है, कि डॉक्टर केवल पर्चा लिख देते हैं और दवाएं बाहर के निजी मेडिकल स्टोरों से खरीदने की सलाह दी जाती है। गरीब मरीज जो सरकारी अस्पताल के भरोसे आते हैं, वे मजबूरन महंगे दामों पर बाहर से दवाएं खरीदने को विवश हैं।

लाखों की लागत से बने भवन सफेद हाथी

जिले के कई क्षेत्रों में आयुर्वेदिक अस्पतालों के लिए लाखों रुपये की लागत से भवनों का निर्माण तो कराया गया, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती न होने के कारण ये भवन अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। कई जगहों पर अस्पताल समय से खुलते ही नहीं हैं और वहां मुख्य द्वार पर ताले लटके दिखाई देते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है, कि अस्पताल केवल कागजों पर चल रहे हैं, धरातल पर महीनों से किसी डॉक्टर ने वहां कदम नहीं रखा है।

शासन को भेजा गया प्रस्ताव: जिला आयुर्वेदिक अधिकारी

जिला आयुर्वेदिक अधिकारी पूनम यादव ने बताया कि जिले में आयुर्वेदिक के 53 अस्पताल हैं, लेकिन उच्च अस्पतालों में डॉक्टर व कर्मचारियों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष काफी कमी है। वर्तमान समय में कुल डॉक्टर 43 तैनात हैं, इसमें कई डॉक्टर छुट्टी भी चल रहे हैं। शासन को पत्र भेजा गया है। वहां से डॉक्टर व कर्मचारियों की तैनाती होने के बाद अस्पतालों में तैनात कर दिया जाएगा। दवा की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

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