बरगी बांध में आए अचानक तूफान ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। इस हादसे में दिल्ली की रहने वाली मरीना मैसी (39) और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान की मौत हो गई।
जबलपुर (मध्य प्रदेश)। बरगी बांध में आए अचानक तूफान ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। दिल्ली से घूमने आए मैसी परिवार के लिए यह सफर जिंदगी का सबसे बुरा सपना साबित हुआ। इस हादसे में दिल्ली की रहने वाली मरीना मैसी (39) और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान की मौत हो गई।
बेटी सिया की जुबानी, हादसे की कहानी
मरीना की बेटी सिया, जो इस हादसे में बच गई, ने अपनी आंखों देखी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे अपने मम्मी-पापा (प्रदीप मैसी और मरीना मैसी) और छोटे भाई के साथ क्रूज पर सवार थे। अचानक तेज तूफान आया और क्रूज बुरी तरह डगमगाने लगा। लोग अपनी जान बचाने के लिए लाइफ जैकेट की ओर भागे।
बेटे को बचाने की आखिरी कोशिश
सिया ने बताया कि स्थिति बिगड़ते देख मां ने क्रूज में रखी लाइफ जैकेट ढूंढी और पहन ली। इसके बाद वह भाई (त्रिशान) को भी जैकेट पहनाने लगीं, लेकिन तब तक क्रूज में पानी भरने लगा और लहरें टकराने लगीं। घबराहट और ममता के वशीभूत होकर मां ने छोटे भाई को अपनी ही लाइफ जैकेट के अंदर समेट लिया ताकि उसे डूबने से बचाया जा सके।
12 घंटे बाद भी सीने से चिपका मिला मासूम
जब क्रूज डूबा, तो पिता प्रदीप और बेटी सिया किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन मरीना और मासूम त्रिशान पानी में समा गए। अगले दिन जब रेस्क्यू टीम ने शवों को बाहर निकाला, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मरीना ने अपने बेटे को इतनी मजबूती से अपनी लाइफ जैकेट के भीतर पकड़ रखा था कि पानी के भीतर भी दोनों अलग नहीं हुए। वे ठीक उसी हालत में मिले, जैसा सिया ने उन्हें आखिरी बार देखा था- मां की गोद में सिमटा हुआ बेटा। मृतक मरीना मैसी (39) और त्रिशान (4) पश्चिमी दिल्ली के खजान बस्ती के रहने वाले थे। पति प्रदीप मैसी और बेटी सिया किसी तरह सुरक्षित निकलने में कामयाब हुए। यह घटना दिखाती है कि एक मां अपनी आखिरी सांस तक अपने बच्चे को सुरक्षा देने की कोशिश करती रही।
क्रूज वापस लौट रहा था, तभी बिगड़ा मौसम
चश्मदीदों ने बताया कि शाम करीब 6 बजे क्रूज वापस लौट रहा था, तभी मौसम अचानक खराब हो गया। तेज हवाओं और लहरों के कारण पानी नाव के भीतर भरने लगा और संतुलन बिगड़ने से नाव पलट गई। जीवित बचे यात्रियों ने आरोप लगाया है कि नाव अपनी क्षमता से अधिक भरी हुई थी। करीब 40 लोग सवार थे और चालक ने सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज किया।SDRF और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर तैनात किया गया। 28 लोगों को सुरक्षित बचाया गया।
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया है। पर्यटन मंत्री ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जांच के आदेश दिए हैं। यह घटना एक बार फिर जल पर्यटन में सुरक्षा मानकों और क्षमता से अधिक सवारी भरने जैसी गंभीर लापरवाहियों पर सवाल खड़े करती है।
लापरवाही के गंभीर आरोप
बचे यात्रियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने प्रशासन और क्रूज चालक दल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यात्रियों का कहना है कि क्रूज पर लाइफ जैकेट मौजूद तो थे, लेकिन वे केबिन में सीलबंद (Seal-pack) हालत में रखे थे। जब जहाज डूबने लगा, तब भी चालक दल ने उन्हें नहीं निकाला। यात्रियों ने खुद केबिन का दरवाजा तोड़कर जैकेट निकालने की कोशिश की।
चेतावनी को किया नजरअंदाज
स्थानीय लोगों और यात्रियों ने मौसम खराब होने पर चालक को किनारे चलने को कहा था, लेकिन चालक ने बात अनसुनी कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य रेस्क्यू टीम घटनास्थल पर लगभग 2 घंटे देरी से पहुँची। शुरुआती बचाव कार्य स्थानीय गोताखोरों और निजी निर्माण कंपनी के कर्मचारियों ने किया।
क्रूज संचालन पर रोक
हादसे के बाद पूरे प्रदेश में फिलहाल क्रूज के संचालन पर रोक लगा दी गई है और मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का भी परिणाम नजर आता है। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
लापरवाही पर उठे सवाल
हादसे के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बचे हुए यात्रियों का आरोप है कि क्रूज पर पर्याप्त लाइफ जैकेट नहीं थे और जो थे, वे भी डूबने के वक्त बांटने में कोताही बरती गई। बरगी में दो क्रूज संचालित थे, जिनमें से एक पहले ही खराब था और दूसरे के साथ यह हादसा हो गया।
मौसम बिगड़ा फिर भी क्रूज को गहरे पानी में ले जाने की दी अनुमति
खराब मौसम के बावजूद क्रूज को गहरे पानी में ले जाने की अनुमति क्यों दी गई, इसकी जांच जारी है। प्रदेशभर में अलर्ट जारी की जा रही है। बरगी त्रासदी का असर मध्य प्रदेश के अन्य जल पर्यटन केंद्रों पर भी दिख रहा है। खंडवा के हनुवंतिया टापू में भी वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने क्लब हाउस और बोट हाउस में सुरक्षा ऑडिट किया। अब बिना सुरक्षा जैकेट के जाने पर भी रोक लगा दी गई है। इंदिरा सागर बांध के बैकवॉटर में भी तेज लहरों के खतरे को देखते हुए क्रूज का संचालन फिलहाल बंद कर दिया गया है।
कई परिवार उजड़े, पर्यटन उद्योग पर संकट
मुख्यमंत्री ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस हादसे ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि जबलपुर के पर्यटन उद्योग और इससे जुड़े सैकड़ों लोगों की आजीविका पर भी संकट खड़ा कर दिया है। शहर की पहचान माना जाने वाला यह क्रूज अब पानी की गहराई में प्रशासन की विफलताओं के बीच कई लोगों की जिंदगी सदा के लिए चली गई।
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