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बंगाल में 5 नए जाति कल्याण बोर्ड

पश्चिम बंगाल में आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्ग की जातियों के लिए अलग-अलग पांच बोर्ड

मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने विधानसभा चुनाव के वक्त आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्ग को रिझाने बाबत उनके विकास, बोली और संस्कृति के विकास के लिए अलग-अलग बोर्ड के गठन करने का निर्णय लिया है।

पश्चिम बंगाल में आदिवासियों दलितों और पिछड़े वर्ग की जातियों के लिए अलग-अलग पांच बोर्ड

State Government |

कोलकाता। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने विधानसभा चुनाव के वक्त आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्ग को रिझाने बाबत उनके विकास, बोली और संस्कृति के विकास के लिए अलग-अलग बोर्ड के गठन करने का निर्णय लिया है।

आदिवासी समुदायों के लिए अलग बोर्ड

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऐलान के मुताबिक अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) मुंडा और कोला के लिए अलग-अलग बोर्ड का गठन किया जाएगा।

दलित समाज के लिए विशेष पहल

इस तरह अनुसूचित जाति (दलित) डोम समुदाय के लिए भी अलग बोर्ड बनाया जाएगा, ताकि उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा मिल सके।

ओबीसी समुदाय के लिए भी अलग व्यवस्था

ओबीसी (पिछड़े वर्ग) के कुभंकार और सदगोप समुदायों के लिए भी अलग-अलग बोर्ड के गठन का फैसला लिया गया है।

विकास और अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बोर्डों के गठन से कमजोर और पिछड़े समुदायों के अधिकारों और परंपराओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को बढ़ावा देने में भी सहूलियत होगी।

समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि वे राज्य में समान और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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