बीएचईएल द्वारा भोपाल स्थित लगभग 2,000 एकड़ खाली भूमि राज्य सरकार को वापस सौंपने से इनकार करने के बाद मध्यप्रदेश सरकार अब इस मुद्दे पर सीधे केंद्र सरकार से संपर्क करने की तैयारी में है।
भोपाल। बीएचईएल द्वारा भोपाल स्थित लगभग 2,000 एकड़ खाली भूमि राज्य सरकार को वापस सौंपने से इनकार करने के बाद मध्यप्रदेश सरकार अब इस मुद्दे पर सीधे केंद्र सरकार से संपर्क करने की तैयारी में है। राज्य सरकार इस भूमि पर लगभग 2,200 एकड़ क्षेत्र में संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) के माध्यम से एक बड़ी परियोजना विकसित करना चाहती है।
राज्य व केंद्र के अधिकारियों ने की चर्चा
राज्य सरकार केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय से संपर्क कर बीएचईएल से भूमि वापस लेने का आग्रह करेगी। इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे केंद्रीय अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे।
योजना पर चर्चा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले वर्ष 28 अप्रैल को राज्य की राजधानी के विकास को लेकर एक बैठक की थी। बैठक में बीएचईएल की भूमि के उपयोग पर 50-50 मॉडल (आधा खर्च बीएचईएल और आधा राज्य सरकार द्वारा) पर चर्चा हुई थी। बैठक में यह भी बताया गया कि भारी उद्योग मंत्रालय और राज्य के नगरीय विकास विभाग के बीच इस भूमि को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी थी।
राज्य सरकार ने दी थी 6000 एकड़ भूमि
हालांकि, राज्य सरकार के प्रस्ताव को बीएचईएल ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि भविष्य में वह स्वयं इस भूमि का उपयोग अपनी परियोजनाओं के लिए कर सकता है। वर्ष 1962 से 1967 के बीच राज्य सरकार ने बीएचईएल को लगभग 6,000 एकड़ भूमि आवंटित की थी, जिसमें से करीब 2,000 एकड़ भूमि वर्तमान में खाली पड़ी है।
कई स्थान पर अतिक्रमण
इस भूमि पर कई स्थानों पर अतिक्रमण भी हो चुका है और बीएचईएल के कई आवास भी खाली पड़े हैं। राज्य सरकार गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ की तर्ज पर यहां एक हाई-टेक सिटी विकसित करना चाहती है। इसी उद्देश्य से अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के माध्यम से अंतिम निर्णय के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
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