भिंड। पुलिस ने यहां कलेक्टर कार्यालय की आर्म्स शाखा में चल रहे एक बहुत बड़े फर्जीवाड़ा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यहाँ मात्र 3 लाख रुपये लेकर फर्जी तरीके से बंदूक के लाइसेंस बनवाए जा रहे थे।
भिंड। पुलिस ने यहां कलेक्टर कार्यालय की आर्म्स शाखा में चल रहे एक बहुत बड़े फर्जीवाड़ा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यहाँ मात्र 3 लाख रुपये लेकर फर्जी तरीके से बंदूक के लाइसेंस बनवाए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कलेक्ट्रेट के कर्मचारी भी शामिल हैं।
ऐसे होता था खेल
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट का जाल काफी गहरा था। चपरासी बाहरी दलालों के संपर्क में रहता था और उनसे फर्जी दस्तावेज (ID प्रूफ, एड्रेस प्रूफ आदि) प्राप्त करता था। आर्म्स शाखा में तैनात महिला क्लर्क इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फाइल तैयार करती थी।
सिस्टम में करते थे हेरफेर
गिरोह इतना शातिर था कि वे ऑनलाइन पोर्टल और कलेक्ट्रेट की भौतिक फाइलों में भी हेरफेर कर देते थे, जिससे प्रथम दृष्टया लाइसेंस असली प्रतीत हों। आरोपियों ने कथित तौर पर एडीएम (ADM) के फर्जी हस्ताक्षर करवाकर या गुमराह करके इन लाइसेंसों को पास करवाया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में अब तक 14 लोग (एमपी और यूपी के विभिन्न जिलों से) गिरफ्तार किये गये हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 पिस्तौल और 315 बोर की राइफल सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया है। गिरफ्तार लोगों में आर्म्स शाखा के दो महत्वपूर्ण कर्मचारी (एक क्लर्क और एक चपरासी) शामिल हैं।
गिरोह ने कई लोगों को फर्जी लाइसेंस बेचे
जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई लोगों को इसी तरह फर्जी लाइसेंस बेचे थे। पुलिस अब उन सभी लोगों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में संदिग्ध तरीके से लाइसेंस प्राप्त किए हैं।
पुलिस कर रही है रिकार्ड की जांच
भिंड पुलिस ने इस खुलासे के बाद सभी पुराने रिकॉर्ड्स को खंगालना शुरू कर दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं।
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