शुक्रवार को मप्र हाई कोर्ट का फैसला आया। शनिवार सुबह भोजशाला के भीतर लोग चुपचाप सिर झुकाए खड़े थे।
धार, इंदौर। शुक्रवार को मप्र हाई कोर्ट का फैसला आया। शनिवार सुबह भोजशाला के भीतर लोग चुपचाप सिर झुकाए खड़े थे। पत्थरों के उस पुराने परिसर में फूलों की खुशबू थी, दीपक जल रहे थे और धीमे स्वर में हनुमान चालीसा गूंज रही थी। लेकिन उस दृश्य में सबसे ज्यादा महसूस वही हो रहा था, जो वहां था ही नहीं— मां वाग्देवी की प्रतिमा।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद उमड़ी भीड़
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में एएसआई (ASI) सर्वे, शिलालेखों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को मंदिर माना। फैसले के अगले ही दिन यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि गुजरात और दूसरे शहरों से भी लोग पहुंचे।
एएसआई ने कहा, हिंदू अब बिना-रोकटोक पूजा कर सकेंगे
भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद नया आदेश जारी किया है। इसमें भोजशाला को मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और संस्कृत अध्ययन का प्राचीन केंद्र बताते हुए हिंदू समाज को पूजा-अर्चना और अध्ययन संबंधी गतिविधियों की अनुमति दी है।
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