MP News : भोपाल। यहां एम्स भोपाल की ट्रॉमा और आपात विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का मामला अब संस्थान के भीतर प्रशासनिक दबाव, कार्यसंस्कृति और विभागीय खींचतान का मामला बन गया है।
MP News : भोपाल। यहां एम्स भोपाल की ट्रॉमा और आपात विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का मामला अब संस्थान के भीतर प्रशासनिक दबाव, कार्यसंस्कृति और विभागीय खींचतान का मामला बन गया है। यह सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी का मामला नहीं है। डॉ. रश्मि ने घर पर जहरीला इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। इसके बाद वे एम्स में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
मालूम हो कि डॉ. रश्मि वर्मा को 10 नवंबर, 2025 की शाम करीब 5 बजे सीरियस मिसकंडक्ट का नोटिस दिया गया था। इस नोटिस से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान थी। नोटिस औऱ अन्य दस्तावेज के सामने आने के बाद बहस तेज हो गई है कि क्या यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई थी? या इसके पीछे विभागीय राजनीति भी है।
डॉ. रश्मि ने अपने लिखित जबाव में कहा था, इस तरह की भाषा वाला नोटिस पीड़ादायक, अपमानजनक और मानसिक रूप से झकझोरने वाला है। साथ ही कहा कि उन्होंने जानबूझकर कभी नियमों का उल्लंघन नहीं किया।
नोटिस के बाद वे अवसाद में चली गईं। डॉ. रश्मि ने 25 से 27 सितंबर 2025 तक की एक कॉन्फ्रेंस के लिए आकादमिक छुट्टी के संबंध में सफाई दी। बताया था कि 25 अगस्त को फैकल्टी ग्रुप में इसकी सूचना दे दी थी। यह विभागीय निर्देश में है। उनका दावा है कि यह मैसेज विभाग प्रमुख ने देखा था। इसके प्रमाण के रूप में उन्होंने फैकल्टी ग्रुप के स्क्रीनशॉट भी संलग्न किए। इसी बीच विभाग का एक और नोटिस सामने आया।
अपॉइंटमेंट के लिए निदेश
इस नोटिस में डॉ. भूपेश्वरी पटेल और डॉ. बाबूलास को छोड़कर बाकी सभी फैकल्टी सदस्यों को अब विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद युनुस से मिलने से पहले अपॉइंटमेंट लेना अनिवार्य होगा। अपॉइंटमेंट के लिए निदेश दिया गया कि डीईओ नितेश कुमार पांडे से संपर्क करना होगा। नोटिस में मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी जारी किए गए। अब कुछ फैकल्टी इसे विभाग में कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में कदम बता रहे हैं तो कुछ अनावश्यक नियंत्रण व मानसिक दबाव वाला कदम बता रहे हैं।
इस बीच डॉं. रश्मि की हालत अब भी गंभीर है। आत्महत्या के प्रयास के बाद उन्हें बुधवार को एम्स में भर्ती कराया गया था। शनिवार सुबह हालत कुछ सुधरी, लेकिन शाम को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि शनिवार शाम को एमआरआई रिपोर्ट निराशाजनक है। इस तरह के मामले में स्थिति स्पष्ट होने में 72 घंटे का समय लगता है। उधर, डॉ. रश्मि के पति डॉ. मनमोहन शाक्य ने बताया, घर में सबकुछ ठीक था, लेकिन कुछ ही देर के बाद बेहोश मिली। इस बीच पुलिस के अनुसार, परिजन बता रहे हैं कि डॉ. रश्मि किसी दबाव या तनाव में नहीं थी। उन्होंने यह कदम क्यों उठाया? इसका कारण स्पष्ट नहीं है। .
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