मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। शहर के आदमपुर छावनी में स्थापित टोरिफाइड चारकोल प्लांट का ट्रायल रन (परीक्षण) शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक शुरू हो गया है।
800 टन कचरे का प्रोसेस होगा
इस महत्वपूर्ण परियोजना में हाईटेक चारकोल प्लांट को तैयार करने में लगभग 220 करोड़ रुपये की लागत आई है। शुरुआती परीक्षण के तौर पर, तीन दिनों के भीतर 800 टन कचरे को प्रोसेस करने का लक्ष्य रखा गया है। पूर्ण रूप से सक्रिय होने के बाद, यह प्लांट हर दिन 400 टन कचरे को प्रोसेस कर उससे कोयला तैयार करेगा।
तकनीक पर्यावरण के अनुकूल
यह तकनीक न केवल कचरे के निपटान में मदद करेगी, बल्कि पारंपरिक कोयले के विकल्प के रूप में 'ग्रीन कोल' प्रदान कर प्रदूषण कम करने में भी सहायक होगी। इस प्लांट में कचरे को विशेष वैज्ञानिक प्रक्रिया (टोरिफिकेशन) के जरिए उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है। इससे वह ठोस और ऊर्जा से भरपूर चारकोल में बदल जाता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाले कोयले का उपयोग बिजली संयंत्रों और उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
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