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पुलिस और स्थानीय लोगों ने बचाया

बिहार: 11 महीने से लापता पत्नी-बेटे की तलाश में भटक रहा पित , आत्मदाह की कोशिश

सदानंद का आरोप है कि उनकी पत्नी शीला देवी (35 वर्ष) और छह वर्षीय पुत्र अंश कुमार का लगभग 11 महीने पहले अपहरण कर लिया गया था, लेकिन आज तक पुलिस उन्हें बरामद नहीं कर सकी है।

बिहार 11 महीने से लापता पत्नी-बेटे की तलाश में भटक रहा पित  आत्मदाह की कोशिश

पीड़ित सदानंद |

मुजफ्फरपुर (बिहार): सकरा थाना क्षेत्र में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अपनी पत्नी और मासूम बेटे की बरामदगी की मांग को लेकर एक पीड़ित पिता ने थाना परिसर के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह उसे रोककर स्थिति को नियंत्रित किया। पीड़ित की पहचान सकरा थाना क्षेत्र के रेपुरा निवासी सदानंद कुमार उर्फ भोला के रूप में हुई है। 

पत्नी और बेटे का 11 महीने पहले हुआ था अपहरण

सदानंद का आरोप है कि उनकी पत्नी शीला देवी (35 वर्ष) और छह वर्षीय पुत्र अंश कुमार का लगभग 11 महीने पहले अपहरण कर लिया गया था, लेकिन आज तक पुलिस उन्हें बरामद नहीं कर सकी है। पीड़ित के अनुसार, 21 अप्रैल 2025 को उनकी पत्नी अपने बेटे के साथ आधार कार्ड बनवाने के लिए सकरा प्रखंड कार्यालय गई थी। इसी दौरान समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के धोकराहा गांव निवासी कमलेश कुमार ने जबरन गाड़ी में बैठाकर दोनों का अपहरण कर लिया। मामले को लेकर सकरा थाना में कांड संख्या 209/25 दर्ज कराया गया था।सदानंद कुमार का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पुलिस अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग को लेकर वे कई बार एसएसपी, एसपी और डीएसपी कार्यालयों का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर जगह उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है।

पुलिस पर मामले को टालने का आरोप

पीड़ित ने अपने पड़ोसी पर भी इस पूरे मामले में संलिप्त होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पुलिस कार्रवाई करने के बजाय मामले को टाल रही है। थाना के सामने प्रदर्शन के दौरान सदानंद कुमार ने इसी दौरान आत्मदाह का प्रयास भी किया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया और मामले की जांच में तेजी लाने का आश्वासन दिया। हालांकि पीड़ित का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली और लंबित मामलों के निष्पादन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिल पाता है।

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