बिहार के अनुसूचित जाति और जनजाति (SC-ST) वर्ग के होनहार छात्रों के लिए अब विदेशों में जाकर पढ़ाई करना सिर्फ एक सपना नहीं रहेगा।
पटना। बिहार के अनुसूचित जाति और जनजाति (SC-ST) वर्ग के होनहार छात्रों के लिए अब विदेशों में जाकर पढ़ाई करना सिर्फ एक सपना नहीं रहेगा। नीतीश सरकार ने इन छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने और उन्हें छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) देने का निर्णय लिया है। राज्य के कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार से मुलाकात के बाद यह जानकारी साझा की।
'नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप' पर केंद्र और राज्य के बीच बनी सहमति
लखेंद्र पासवान ने बताया कि केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के साथ बैठक में केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं को लेकर दिल्ली में अहम चर्चा हुई है। पासवान ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के समक्ष ‘नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना’ के तहत विदेश जाने वाले बिहार के एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने का प्रस्ताव रखा, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने अपनी सहमति जता दी।
छात्रों के रहने के लिए बनेंगे आधुनिक छात्रावास, बजट को मिली मंजूरी
एससी-एसटी कल्याण मंत्री ने राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के शैक्षणिक उत्थान के लिए नए छात्रावासों की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से प्रति छात्र 3.5 से चार लाख रुपये की दर से राशि आवंटित करने की मांग की। उन्होंने बताया कि 100 छात्रों के लिए लगभग चार करोड़ रुपये और 200 छात्रों के लिए लगभग आठ करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इस प्रस्ताव पर भी केंद्रीय मंत्री ने सहमति व्यक्त की।
अनुसूचित जाति बहुल गांवों के लिए मिलेगा विशेष फंड
इसके अलावा, मंत्री पासवान ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष ‘प्रधानमंत्री अजय योजना’ के तहत 40 प्रतिशत अथवा 500 से अधिक एससी आबादी वाले गांवों के लिए ‘प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम’ योजना के अंतर्गत प्रति ग्राम 20 लाख रुपये की ‘गैप फिलिंग’ राशि देने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को भी केंद्रीय मंत्री ने स्वीकृति प्रदान की।
बिहार के दलित टोलों में लगेंगे सोलर लाइट
इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बिहार सरकार ‘गांव विकास योजना’ का चयन कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे, ताकि अनुशंसाओं के आधार पर एससी-एसटी टोलों में सोलर लाइट इंफ्रास्ट्रक्चर एवं अन्य विकासात्मक योजनाओं को शामिल किया जा सके।
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