West bengal : भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्षी दल के नेता सुवेंदु अधिकारी के एक बयान ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को अजमंजस में डाल दिया है।
West bengal : भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्षी दल के नेता सुवेंदु अधिकारी के एक बयान ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को अजमंजस में डाल दिया है कि वे कैसे दूसरी पर्टी से आए नेताओं को पुराने नेता के समान होने का विश्वास दिलाएं? पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी के नए और पुराने नेताओं के बीच की दूरी का खुलासा न होने देना और आपसी एकता दर्शाना जरूरी है।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के शीर्ष नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर गुरुवार को आयोजित स्मरण सभा में विपक्षी दल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि दूसरी पार्टी (टीएमसी) से आए नेता तीन प्रकार के होते हैं। एक वे जो ठीक चुनाव के पहले दूसरी पार्टी से भाजपा में आए और चुनाव में टिकट पाए, लेकिन चुनाव में हार गए और फिर उस पार्टी में चले गए, जिस पार्टी में आए थे। दूसरे वे हैं जो दूसरी पार्टी से भाजपा में आए और चुनाव में जीते, लेकिन जीत कर भी उसी पार्टी में चले गए, जिस पार्टी से आए थे। तीसरे वे हैं, जो दूसरी पार्टी में मजे में थे, लेकिन सिद्धांत के कारण पद व सुविधा छोड़कर भाजपा में आए और आखिर तक निष्ठा से बने रहे। सुवेंदु अधिकारी ने अपने को तीसरे प्रकार का नेता बताया।
इस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद शमिक भट्टाचार्य ने सुवेंदु अधिकारी को भाजपा का वरिष्ठ और महत्वरपूर्ण नेता बताया और कहा कि वे (सुवेंदु आधिकारी) ऐसी बात नहीं करें। उनका संकेत यह था कि सुवेंदु अधिकारी को भाजपा में पूरा सम्मान और अधिकार प्राप्त है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पांच-छह साल पहले यानी 2019 में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले टीएमसी से कई वरिष्ठ नेता और उनके साथ तमाम कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए, लेकिन बाद में अधिकर वापस टीएमसी में चले गए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और टीएमसी में वरिष्ठ नेता रहे मुकुल राय भी ऐसे नेता थे जो भाजपा में आए और फिर वापस चले गए।
मुकुल राय भाजपा के विधायक रहते हुए टीएमसी में चल गए। सुवेंदु अधिकारी उनके खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में गए और मुकुल राय का विधायक पद चला गया। भाजपा के पूर्व सांसद अर्जुन सिंह भी ऐसे नेता हैं, जो टीएमसी से भाजपा में आए और फिर टीएमसी में चले गए, लेकिन फिर भाजपा में वापस आ गए। भाजपा में टीएमसी से आए नेताओं और भाजपा में पहले से रहने वाले नेताओं के बीच “नए-पुराने” की लकीर बनी हुई है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की स्थिति मजबूत करने में सुवेंदु अधिकारी की अहम भूमिका मानी जाती है। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को परास्त किया था। वाम मोर्चा की सरकार के 2011 में विधानसभा चुनाव में चले जाने का एक मुख्य कारण ममता बनर्जी के नंदीग्राम आंदोलन माना जाता है। शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें उसी क्षेत्र से परास्त किया। राजनीतिक गलियारे में शुभेंदु अधिकारी को भावी मुख्यमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है। लेकिन शुभेंदु अधिकारी को भय है कि “नए-पुराने” की लकीर की वजह से कहीं उनके साथ धोखा न हो जाए।
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