सॉल्ट लेक स्टेडियम में फुटबॉल जगत के अव्वल खिलाड़ी लियोनल मेसी के कार्यक्रम में तोड़फोड़, आगजनी और लाठी चार्ज की घटना के दौरान दर्शक गैलरी से खेल के मैदान में पीने के पानी की बोतले खूब फेंकी गई।
Bottles of water and cold drinks sold at exorbitant prices in Salt Lake Stadium |
कोलकाता। पीने के पानी की बोतलें कर रही हैं राज्य सरकार, प्रशासन, पुलिस, कार्यक्रम आय़ोजकों, खेल प्रेमियों को पानी पानी। कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में फुटबॉल जगत के अव्वल खिलाड़ी लियोनल मेसी के कार्यक्रम में तोड़फोड़, आगजनी और लाठी चार्ज की घटना के दौरान दर्शक गैलरी से खेल के मैदान में पीने के पानी की बोतले खूब फेंकी गई। फेंकी गई बोतलों की वजह से ऐस-ऐसे सवाल उठ खड़े हुए हैं कि सभी कठघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। सॉल्ट लेक स्टेडयम का दूसरा नाम विवेकानंद युवाभारती क्रीड़ांगन है।
स्टेडियम में नहीं थी खाने-पीने के सामान ले जाने की अनुमति
निर्धारित नियम के अनुसार कोई भी स्टेडियम में पीने के पानी की बोतले नहीं ले जा सकता। अपने घर का भी पानी नहीं ला सकता। कोई भी खाने का सामान भी नहीं ला सकता। स्टेडियम में कोई बड़ा से बड़ा कार्यक्रम क्यों न हो, उसमें भी कभी पानी की बोतलें और खाने के सामान ले जाने की अनुमति नहीं दी गई।
अत्यधिक कीमतों पर बेची गई पानी व कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलें
मेसी के कार्यक्रम में भी यही बात लागू थी। विधाननगर के टीसी अनिश सरकार का तो साफ-साफ कहना है कि "स्टेडियम के सभी प्रवेश द्वार पर तैनात पुलिस के जवानों ने दर्शकों की पूरी तलाशी लेकर उन्हें अंदर जाने दिया था। किसी के पास पीने के पानी का कोई बोतल और ना ही खाने का सामान था।" लेकिन जब दर्शक स्टेडियम के अंदर गए तो देखा पीने के पानी की बोतल 20 रुपए की जगह 200 रुपए में बिक रही है। कोलड्रिंस की छोटी बोतल डेढ़ सौ रुपए में मिल रही है। खाने के सामान भी दस-पंद्रह गुणा कीमतों में बिक रही है।
दूसरे राज्य के लोगों को दिया गया था टेंडर
घटना होने के बाद पता चला कि पीने का पानी की बोतलों, खाने के सामानों के लिए टेंडर हुआ था। टेंडर लेने वाले पश्चिमं बंगाल के नहीं, दूसरे राज्य के थे। उनके कर्मचारी भी दूसरे राज्य के हैं। जब हंगामा, तोड़फोड़, आगजनी, दर्शक व पुलिस के बीच झड़प, लाठी चार्ज हुआ तो पीने के पानी के बोतल, खाने के सामान बेचने वाले भाग खड़े हुए। पता चला कि पीने के पानी की बोतलों की पांच सौ पेटी अंदर थी। चार सौ पेटी और आने वाली थी। साने के पैकेटों का भी यही हाल था।
गलत तरीके से दिए गए टेंडर, हुई नियमों की अनदेखी
सवाल यह उठ रहा है कि पीने के पानी की बोतलों और खाने के सामानों के लिए किसकी इजाजत से टेंडर हुआ। जब ये सामान अंदर थे तो पुलिस अधिकारी क्या कर रहे थे। क्या वे स्टेडियम के नियम भूल गए। सामान इतने ऊंची कीमत पर बेचे जा रहे थे, तो क्या वे देख नहीं रहे थे। क्या इतने सामान वीआइपी के नाम पर लाए गए। वे कितनी संख्या में रहे होंगे। फिर दर्शक भी क्यों ऊंची कीमत पर खरीदने लगे।
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