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मथुरा में ब्राह्मण समाज ने की रावण की आरती

मथुरा में सारस्वत ब्राह्मण समाज ने की रावण की आरती, पुतला दहन का किया विरोध

उत्तर प्रदेश के मथुरा में विजयादशमी के मौके पर सारस्वत ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने रावण की विशेष पूजा-अर्चना की और आरती उतारी।

मथुरा में सारस्वत ब्राह्मण समाज ने की रावण की आरती पुतला दहन का किया विरोध

Brahmin Community Performs Ravana Aarti in Mathura, Opposes Effigy Burning |

मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा में विजयादशमी के मौके पर सारस्वत ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने रावण की विशेष पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। लंकेश भक्त मंडल के संरक्षक ओमवीर सारस्वत ने रावण का पुतला जलाने की परंपरा पर आपत्ति जताई। उन्होंने रावण को सारस्वत समुदाय से जुड़ा बताते हुए उसकी विद्वता का उल्लेख किया।

रावण को बताया महान विद्वान

ओमवीर सारस्वत ने कहा कि रावण सारस्वत समुदाय से थे और बहुत बड़े विद्वान थे। उन्होंने रावण का पुतला जलाने की परंपरा की निंदा करते हुए कहा कि समुदाय इस परंपरा का विरोध करता है। उनके मुताबिक, रावण को केवल उसके वध के संदर्भ में नहीं, बल्कि उसकी विद्वता के लिए भी याद किया जाना चाहिए।

भगवान राम के आचार्य होने का किया जिक्र

ओमवीर सारस्वत ने रावण से जुड़ी एक धार्मिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम के वनवास के दौरान रामेश्वरम में भगवान शिव की स्थापना के समय रावण ने उनके आचार्य यानी पुजारी की भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा संपन्न होने के बाद आचार्य को दक्षिणा देने की परंपरा है। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कथा का जिक्र करते हुए कहा कि जब भगवान राम ने रावण से दक्षिणा मांगने के लिए कहा, तो रावण ने अपने अंतिम समय में भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण के सामने मौजूद रहने की इच्छा जताई थी।

रावण के अंतिम समय से जुड़ी कथा का उल्लेख

ओमवीर ने कहा कि अलग-अलग कथाओं में वर्णित है कि रावण के अंतिम समय में भगवान राम और लक्ष्मण उसके सामने मौजूद थे। उन्होंने इस प्रसंग के जरिए रावण के जीवन से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और कथाओं पर अपनी बात रखी। विजयादशमी यानी दशहरा नवरात्रि के समापन पर मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान राम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। दशहरे पर रावण दहन की परंपरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। वहीं, मथुरा में सारस्वत ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने रावण की पूजा-अर्चना कर उसके पुतला दहन का विरोध जताया।

(एएनआई)

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