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कल्याण में बिल्डरों पर 176 करोड़ धोखाधड़ी का केस

महाराष्ट्र: कल्याण में बिल्डरों पर 176 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का केस, 2022 से बंद है प्रोजेक्ट

खड़कपाड़ा पुलिस ने कल्याण में एक परियोजना से जुड़े तीन बिल्डरों के खिलाफ 176 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

महाराष्ट्र कल्याण में बिल्डरों पर 176 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का केस 2022 से बंद है प्रोजेक्ट

Builders Face ₹176 Crore Fraud Case in Kalyan |

कल्याण (महाराष्ट्र) [भारत]: खड़कपाड़ा पुलिस ने कल्याण में एक परियोजना से जुड़े तीन बिल्डरों के खिलाफ 176 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। यह मामला 66 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति की शिकायत के बाद दर्ज किया गया है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि परियोजना अधूरी रहने के बावजूद उनसे और सैकड़ों अन्य घर खरीदारों से भारी रकम वसूल की गई।

तीन बिल्डरों समेत अन्य के खिलाफ केस

पुलिस ने बिल्डरों श्रीकांत दिगंबर शितोले, चेतन सराफ, महेश गोसावी और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है। शिकायत के अनुसार, नंदा प्रभाकर म्हात्रे ने 31 अगस्त 2021 को खड़कपाड़ा स्थित ताइकुन गोल्ड एवेन्यू परियोजना के तहत गोल्डमाइन एवेन्यू-1 की ए विंग की 11वीं मंजिल पर फ्लैट नंबर 1101 बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत करीब 68.15 लाख रुपये तय की गई थी। म्हात्रे ने बताया कि पंजीकरण के समय तक उन्होंने चेक और होम लोन के जरिए फ्लैट के लिए करीब 39.36 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। 7 अक्टूबर 2021 को एक पंजीकृत बिक्री समझौता किया गया था, जिसके तहत जुलाई 2025 तक फ्लैट का कब्जा सौंपा जाना था।

43 लाख का होम लोन लिया था

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने इंडियन बैंक की पनवेल शाखा से 43 लाख रुपये का होम लोन लिया था, जिसमें से 23 लाख रुपये बिल्डरों को दिए गए थे। हालांकि, शिकायत के मुताबिक, ताइकुन गोल्ड एवेन्यू परियोजना का निर्माण कार्य 2022 में लगभग रुक गया। उस समय तक निर्माण कथित तौर पर केवल नौवीं या दसवीं मंजिल तक ही पहुंचा था और उसके बाद आगे नहीं बढ़ा। आरोप है कि परियोजना फिलहाल ठप पड़ी है।

निर्माण शुरू होने का बार-बार दिया आश्वासन

शिकायत में कहा गया है कि बिल्डरों ने बाद में फ्लैट खरीदारों के साथ कई बैठकें कीं और उन्हें बार-बार आश्वासन दिया कि अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य फिर से शुरू हो जाएगा। खरीदारों को यह भी बताया गया कि स्वामीह फंड के माध्यम से ऋण स्वीकृत हो गया है और इस राशि का इस्तेमाल निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने के लिए किया जाएगा। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन आश्वासनों के बावजूद काम दोबारा शुरू नहीं हुआ।

किराया और ब्याज नहीं देने का भी आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिक्री समझौते में ऐसे प्रावधान थे, जिनके तहत तय अवधि में कब्जा नहीं देने पर डेवलपर को खरीदारों को ब्याज और किराया देना था। म्हात्रे ने आरोप लगाया कि इन दायित्वों का पालन नहीं किया गया। जब उन्होंने किराए और ब्याज के भुगतान की मांग की तो बिल्डरों ने कथित तौर पर कहा कि उनके पास भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं।

पुनर्विकास परियोजना से जुड़े 184 निवासी

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मामला नई परियोजना में फ्लैट खरीदने वालों तक सीमित नहीं है। इसमें चिकनघर क्षेत्र की छह पुरानी इमारतों के 184 मौजूदा निवासियों से जुड़ी पुनर्विकास परियोजना भी शामिल है। शिकायत के अनुसार, छह इमारतों के निवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाली समितियों ने मिलकर चिकनघर शांतिता सहकारी आवास समिति का गठन किया था। इस समिति ने 2011 में पुनर्विकास प्रक्रिया शुरू की थी।

डेवलपर्स को दी गई थी पुनर्विकास की जिम्मेदारी

इसके बाद ताइकुन अवंती प्रोजेक्ट्स एलएलपी नाम से एक संयुक्त उद्यम बनाया गया। शिकायत में कहा गया है कि 12 अगस्त 2013 को निष्पादित एक सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी और इसके बाद 12 अगस्त 2014 को निष्पादित एक अन्य पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए डेवलपर्स को पुनर्विकास परियोजना के अधिकार दिए गए थे।  पुनर्विकास व्यवस्था के तहत सोसायटी के 184 सदस्यों को नए फ्लैट मिलने थे। वहीं, पुनर्विकास अवधि के दौरान डेवलपर को उन्हें किराया देने की जिम्मेदारी भी थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन प्रतिबद्धताओं को भी पूरा नहीं किया गया।

176 करोड़ से ज्यादा की राशि जुटाने का आरोप

शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि फ्लैट खरीदारों से बड़ी रकम वसूलने के बाद डेवलपर्स ने कथित तौर पर परियोजना पूरी करने और कब्जा देने के बजाय पैसे को कहीं और निवेश कर दिया या उसका दुरुपयोग किया। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि डेवलपर्स ने सोसायटी की जमीन को गिरवी रखने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग किया। शिकायत के अनुसार, परियोजना में करीब सात से आठ इमारतें शामिल हैं और डेवलपर को 29 मंजिलों तक निर्माण की अनुमति है। हालांकि, निर्माण अभी भी अधूरा है और शिकायतकर्ता का आरोप है कि पर्याप्त भुगतान के बावजूद अब तक किसी भी फ्लैट खरीदार को कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि सैकड़ों खरीदारों से एकत्र की गई राशि 176 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें उसके द्वारा भुगतान की गई करीब 39.36 लाख रुपये की राशि भी शामिल है, जिसके कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।

पुलिस खंगाल रही वित्तीय लेनदेन

पुलिस अब परियोजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। इसमें घर खरीदारों से एकत्र की गई राशि, परियोजना के दस्तावेज, आवास समिति के साथ समझौते, समिति की जमीन से जुड़े स्वामित्व और बंधक रिकॉर्ड तथा धन के कथित गबन की जांच शामिल है। पुलिस ने बताया कि जांच में तीनों नामजद बिल्डरों और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।

(एएनआई)

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