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कैबिनेट ने GEC-III को दी मंजूरी

कैबिनेट ने GEC-III को दी मंजूरी, 135 GW ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन को मिलेगी रफ्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा के ट्रांसमिशन के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।

कैबिनेट ने gec-iii को दी मंजूरी 135 gw ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन को मिलेगी रफ्तार

कैबिनेट ने GEC-III को दी मंजूरी |

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) योजना को मंजूरी दे दी। यह ऐतिहासिक पहल भारत की अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (InSTS) को मजबूत करेगी, जिससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट (GW) तक नवीकरणीय ऊर्जा का परिवहन संभव हो सकेगा।

50 गीगावाट BESS से ग्रिड को मिलेगी मजबूती

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के निर्णयों के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना में नवीकरणीय ऊर्जा (RE) डेवलपर/जनरेटर के छोर पर या ग्रिड लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण किसी अन्य स्थान पर 50 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की स्थापना का भी प्रावधान है, ताकि अनियमितता, भीड़भाड़, पीक आवर में कटौती और गैर-सौर ऊर्जा की मांग को पूरा किया जा सके।  

2032-33 तक 1.86 लाख करोड़ की परियोजना का लक्ष्य

'X' पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस कदम से विनिर्माण, निर्माण और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में अधिक रोजगार सृजित होंगे। 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता की ओर बड़ा कदम। उनके द्वारा दिए गए प्रेजेंटेशन में योजना को पीएम धारा (परिभाषित और त्वरित नवीकरणीय ऊर्जा पहुंच विकास) के रूप में वर्णित किया गया। यह योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर ग्रिड एकीकरण और बिजली वितरण को सुगम बनाएगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक 1,86,405 करोड़ रुपये के कुल परियोजना परिव्यय के साथ स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसमें जीईसी-III के तहत अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणालियों (इनएसटीएस) के विकास के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीएसई) के लिए 50,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। 

54 हजार करोड़ की केंद्रीय सहायता से सस्ती होगी बिजली

इस योजना में कुल 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है। केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क को कम करने में मदद करेगी, जिससे बिजली की लागत कम रहेगी। इनएसटीएस घटक के तहत सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाएं टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएंगी, जबकि ब्राउनफील्ड उन्नयन और नेटवर्क सुदृढ़ीकरण कार्य लागत-अतिरिक्त आधार (सीपीबी) पर निष्पादित किए जाएंगे। राज्य की ट्रांसमिशन यूटिलिटीज समग्र कार्यान्वयन एजेंसी होंगी और ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर्स (टीएसपी) बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेंटेन (बीओओएम) मॉडल के तहत टीबीसीबी में भाग लेंगे। 

900 गीगावाट लक्ष्य के साथ रोजगार के नए अवसर

विज्ञप्ति में कहा गया है, यह योजना 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी। यह योजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में भी योगदान देगी और कार्बन फुटप्रिंट को कम करके पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ विकास को बढ़ावा देगी। इसमें आगे कहा गया है, इससे विद्युत क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण उद्योगों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीएसई) के निर्माण और तैनाती से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में अतिरिक्त रोजगार सृजित होगा। यह योजना भाग लेने वाले राज्यों में संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन में दीर्घकालिक कुशल रोजगार भी सृजित करेगी। 

(इनपुट: ANI)

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