संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह के बाद जान गंवाने वाले तिब्बती कार्यकर्ता लोगान रंगजेन की स्मृति में धर्मशाला और लद्दाख में तिब्बती समुदाय ने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
Candlelight Vigils Held in Dharamshala and Ladakh for Tibetan Activist Who Died After Self-Immolation |
धर्मशाला,(हिमाचल प्रदेश)। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह करने वाले तिब्बती कार्यकर्ता लोगान रंगजेन के निधन पर शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और लद्दाख में तिब्बती निर्वासित समुदाय ने मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। रंगजेन ने 2 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर तिब्बती स्वतंत्रता की मांग को लेकर आत्मदाह किया था।
निर्वासित तिब्बती समुदाय में शोक और आक्रोश का माहौल
इस घटना के बाद निर्वासित तिब्बती समुदाय में शोक और आक्रोश का माहौल है। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के प्रमुख सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि रंगजेन का बलिदान चीन की नीतियों, विशेष रूप से 1 जुलाई से लागू किए गए, जातीय एकता और प्रगति कानून के प्रति तिब्बतियों की गहरी चिंता और असंतोष को दर्शाता है।
चीन द्वारा पारित जातीय एकता और प्रगति कानून के विरोध में प्रदर्शन
धर्मशाला में मीडिया से बातचीत करते हुए त्सेरिंग ने कहा, कि उन्हें सुबह इस दुखद घटना की जानकारी मिली। उन्होंने बताया, कि हाल के दिनों में दुनिया भर में तिब्बती समुदाय और तिब्बत समर्थकों ने चीन द्वारा पारित जातीय एकता और प्रगति कानून के विरोध में प्रदर्शन किए हैं। उनके अनुसार, यदि यह कानून लंबे समय तक लागू रहा तो, तिब्बती समुदाय पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने इस कानून को वापस लेने की मांग भी की।
अनुच्छेद 63 का हो रहा विरोध
त्सेरिंग ने दावा किया, कि कानून के अनुच्छेद 63 में ऐसे प्रावधान हैं, जिनके तहत इस कानून की आलोचना या विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा, कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। रंगजेन के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया, कि उनका जन्म तिब्बत के कंज़े क्षेत्र में हुआ था। 1990 के दशक की शुरुआत में वे तिब्बत छोड़कर भारत आए और बाद में 2005-06 के आसपास अमेरिका में बस गए। वे न्यूयॉर्क में तिब्बती समुदाय की गतिविधियों और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे।
यह घटना तिब्बती समुदाय की गहरी निराशा का प्रतीक
त्सेरिंग ने कहा, कि रंगजेन ने कभी स्वतंत्र तिब्बत नहीं देखा और उनका जीवन निर्वासन तथा तिब्बत की स्थिति से जुड़ी चिंताओं के बीच बीता। उनके अनुसार, यह घटना तिब्बती समुदाय की गहरी निराशा को दर्शाती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, कि बौद्ध परंपरा में जीवन अत्यंत मूल्यवान माना जाता है और उन्होंने लोगों से ऐसे कदम न उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, कि लंबे समय तक जीवित रहकर भी अपने उद्देश्य के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य किया जा सकता है।
लद्दाख में भी तिब्बती युवा कांग्रेस के नेतृत्व में मोमबत्ती जुलूस
इस बीच, लद्दाख में भी तिब्बती युवा कांग्रेस के नेतृत्व में लोगान रंगजेन की स्मृति में मोमबत्ती जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। (एएनआई)
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