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100 करोड़ भूमि घोटाले की जांच तेज

पलानी मठ की 100 करोड़ की भूमि घोटाले की जांच तेज, सीबीसीआईडी की बड़ी कार्रवाई

पलानी मठ की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि के कथित फर्जी पंजीकरण मामले में सीबीसीआईडी ने जांच तेज कर दी है।

पलानी मठ की 100 करोड़ की भूमि घोटाले की जांच तेज सीबीसीआईडी की बड़ी कार्रवाई

CB-CID Intensifies Probe into ₹100 Crore Palani Mutt Land Scam |

चेन्नई,(तमिलनाडु)। तमिलनाडु के पलानी स्थित अरुलमिगु धंदायुथापनी स्वामी मठ की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन के कथित फर्जी पंजीकरण मामले में जांच तेज हो गई है। शुक्रवार को डिंडीगुल स्थित सीबीसीआईडी कार्यालय में जिला सीबीसीआईडी अधीक्षक सजिता के नेतृत्व में मामले की गहन जांच की गई। इस दौरान पलानी हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग के पांच से अधिक अधिकारियों से भी पूछताछ की गई।

लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि कथित तौर पर केवल 2 करोड़ रुपये में पंजीकृत

जांच एजेंसियों के अनुसार, पलानी की तलहटी स्थित सन्निधि स्ट्रीट में मठ की लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर और न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए केवल 2 करोड़ रुपये में पंजीकृत कर दिया गया। मामले में दस्तावेजों की वैधता, पंजीकरण प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

पलानी मंदिर भूमि प्रभाग के अधीक्षक एस. मुरुगनंदम ने शिकायत की दर्ज

पलानी स्थित अरुलमिगु धंदापानी स्वामीगल मठ की 1.35 एकड़ भूमि के कथित फर्जी पंजीकरण मामले में जांच तेज हो गई है। तमिलनाडु सरकार ने इस प्रकरण की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी है। इसके बाद सीबीसीआईडी ने एफआईआर दर्ज कर कई अधिकारियों की टीम के साथ जांच शुरू कर दी। यह मामला पलानी मंदिर भूमि प्रभाग के अधीक्षक एस. मुरुगनंदम की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत के आधार पर पलानी आदिवाराम पुलिस ने उप-पंजीयक जस्टिन मणिकंदन, कथित फर्जी ट्रस्ट सदस्य मुरुगदास और तीन अन्य लोगों के खिलाफ नए आपराधिक कानूनों के तहत साजिश, धोखाधड़ी सहित पांच धाराओं में मामला दर्ज किया था।

पलानी की विवादित 1.35 एकड़ भूमि अमान्य घोषित

शुक्रवार को दिंडीगुल स्थित सीबीसीआईडी कार्यालय में मदुरै की जिला सीबीसीआईडी अधीक्षक सजिता ने स्वयं जांच की निगरानी की। उन्होंने मुरुगनंदम, तहसीलदार, ग्राम प्रशासनिक अधिकारी समेत पांच से अधिक अधिकारियों से पूछताछ कर मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की जानकारी जुटाई। इस बीच, मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पलानी की विवादित 1.35 एकड़ भूमि से संबंधित बिक्री विलेख को "अमान्य" घोषित कर दिया। न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उप-पंजीयक को दस्तावेज वैध पाए जाने पर उसका पंजीकरण करने का निर्देश दिया गया था।

एकल पीठ का आदेश कानून और उपलब्ध तथ्यों के विपरीत

विवादित दस्तावेज का पंजीकरण करने वाले तत्कालीन प्रभारी उप-पंजीयक जस्टिन मणिकंदन सुब्रमणियन को निलंबित कर दिया गया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। अपने बचाव में उन्होंने कहा कि बिक्री विलेख का पंजीकरण अदालत के आदेश का पालन करते हुए किया गया था। मठ प्रशासन ने अपनी अपील में कहा कि एकल पीठ का आदेश कानून और उपलब्ध तथ्यों के विपरीत था। मठ का आरोप है कि रिट याचिका पर सभी आवश्यक पक्षों को सुने बिना फैसला सुनाया गया और मठ को पक्षकार भी नहीं बनाया गया। संस्था का दावा है कि पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से इस तरह अपनाई गई ताकि उसकी आपत्तियों से बचा जा सके।

मठ की संपत्ति को निजी ट्रस्ट की संपत्ति दर्शाकर बेचा

मठ का यह भी कहना है कि विवादित बिक्री विलेख में भूमि को एक निजी ट्रस्ट की संपत्ति दर्शाकर बेचा गया, जबकि यह वास्तव में मठ की संपत्ति है। साथ ही याचिकाकर्ता ने अदालत से यह तथ्य भी छिपाया कि भूमि का वास्तविक कब्जा किसी अन्य पक्ष के पास था। मठ के अनुसार, इन गंभीर तथ्यों की अनदेखी कर पंजीकरण को वैध मानना भविष्य में और अधिक कानूनी विवाद पैदा कर सकता है। इस मामले में पलानी आदिवाराम पुलिस ने दो निजी व्यक्तियों के नाम पर 1.35 एकड़ भूमि के कथित फर्जी पंजीकरण को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। शिकायत मठ के एक ट्रस्टी की ओर से दी गई थी।

बिक्री विलेख को रद्द करने की मांग

मंदिर प्रशासन ने पंजीकरण महानिरीक्षक से बिक्री विलेख को रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि यह लेन-देन कई न्यायालयी आदेशों का उल्लंघन कर किया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार, पलानी नगर के वार्ड संख्या-3 में स्थित यह भूमि पुराने सर्वे नंबर 998 और 999 के अंतर्गत आती है। वर्ष 1888 में किए गए एक धर्मार्थ निपटान विलेख के तहत यह संपत्ति मठ को समर्पित की गई थी। विलेख में स्पष्ट उल्लेख है कि इस भूमि का उपयोग केवल मठ के रखरखाव, धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं की सेवा के लिए किया जाएगा तथा इसे निजी संपत्ति की तरह बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। (एएनआई)

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