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धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन करने का आरोप

सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के फंड गबन मामले में दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया

जांच में पता चला है कि दोनों आरोपियों ने बैंक अधिकारी के रूप में अपनी-अपनी भूमिकाओं में बैंक खाते खोलने और धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के फंड गबन मामले में दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, मोहाली शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चरणजीत सिंह रंधावा को हरियाणा सरकार के विभागों के धन के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया। इन पर अधिशेष निधियों को अनियमित रूप से सावधि जमा में निवेश करने और इस उद्देश्य से खोले गए बैंक खातों के माध्यम से धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन करने का आरोप है।

दोनों ने अपनी भूमिकाओं का इस्तेमाल धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन में किया

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जांच में पता चला है कि दोनों आरोपियों ने बैंक अधिकारी के रूप में अपनी-अपनी भूमिकाओं में बैंक खाते खोलने और धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके माध्यम से सार्वजनिक धन का गबन किया गया। जांच के दौरान, उनके खिलाफ पुख्ता सबूत के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।  यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा में हुई, जिसमें हरियाणा सरकार के 8 विभागों के 504 करोड़ रुपये फर्जी/निष्क्रिय सावधि जमा/डेबिट नोटों के माध्यम से निकाल लिए गए और फर्जी कंपनियों को भेज दिए गए। विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। अब तक, सीबीआई ने हरियाणा के इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए हैं, जिनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक/एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 सरकारी कर्मचारी, 2 कंपनियां और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं। (एएनआई)

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