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निर्यातकों को 497 करोड़ का राहत पैकेज

केन्द्र ने किया निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान

नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका ईरान युद्ध के कारण संकट का सामना कर रहे निर्यातकों को आर्थिक सहायता का एलान किया है।

केन्द्र ने किया निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान

Exporters Relief |

नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका ईरान युद्ध के कारण संकट का सामना कर रहे निर्यातकों को आर्थिक सहायता का एलान किया है। केन्द्र की 'रिलीफ' (निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप) योजना की घोषणा के तहत निर्यातकों को बीमा सहायता के लिए 497 करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया जाएगा।

निर्यातकों की समस्याओं से सरकार अवगत

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि सरकार निर्यातकों की समस्याओं से अवगत है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा,“ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पश्चिम एशिया के कुछ देशों के लिए भेजे जाने वाले निर्यात अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए हैं। भविष्य के निर्यात भी प्रभावित हो रहे हैं। निर्यातकों में, विशेषकर पश्चिम एशियाई बाजारों से जुड़े निर्यातकों में चिंता का माहौल है।”

बीमा और माल भाड़े में मिलेगी राहत

वाणिज्य सचिव ने कहा कि राहत के लिए वित्त मंत्रालय और आरबीआई निर्यातकों को राहत देने के साथ-साथ जहाजों के लिए प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (पी एंड आई) क्लब के माध्यम से बीमा प्रदान करने पर काम कर रहे हैं क्योंकि जहाजों के लिए युद्ध जोखिम प्रीमियम में भारी वृद्धि हुई है। इसके तहत निर्यातकों को नई खेप भेजने के लिए 95 फीसदी बीमा कवरेज मिलेगा। इसके अलावा भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) के दायरे से बाहर वाले निर्यातकों को अतिरिक्त माल भाड़े व बीमा लागत का 50 फीसदी तक प्रतिपूर्ति होगी।

खाड़ी क्षेत्र के निर्यातकों में चिंता

उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण व्यापारिक माहौल पर कुछ प्रभाव पड़ा है और निर्यातकों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर खाड़ी क्षेत्र से जुड़े निर्यातकों में "चिंता की भावना" है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण कई जहाज फंसे हुए हैं और उनमें से कई वापस लौट चुके हैं, जिसे व्यापारिक भाषा में 'शहर लौटना' कहा जाता है। अग्रवाल ने बताया कि एक अंतर-मंत्रालयी समूह प्रतिदिन बैठक कर रहा है और निर्यातकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए काम कर रहा है।

इन देशों को भेजे जाने वाले निर्यात पर मिलेगा लाभ

योजना का लाभ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत, ओमान, ईरान, इस्त्राइल, यमन, सऊदी अरब, बहरीन व ईराक सामान भेज रहे निर्यातकों या वहां से होकर गुजरने वाली खेप पर मिलेगा। केन्द्र सरकार ने ईसीजीसी निगम को सत्यापन, दावा प्रसंस्करण, वितरण और निगरानी व निर्यात ऋण जोखिम कवर प्रदान करने का जिम्मा सौंपा है।

17-18 क्षेत्रों के निर्यातकों पर फोकस

वाणिज्य मंत्रालय में सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत यह नई योजना विशेष रूप से उन 17-18 भौगोलिक क्षेत्रों के निर्यातकों पर केंद्रित है, जो संघर्ष से प्रभावित हुए हैं। राहत योजना के तहत पैकेज में निर्यात दायित्वों का स्वचालित विस्तार, लॉजिस्टिक संबंधी सहायता और खेप में देरी को प्रबंधित करने के लिए संभावित वित्तीय उपाय शामिल किए गए हैं। वाणिज्य सचिव ने बताया, विभिन्न सरकारी विभागों को मिलाकर एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया गया है।

राहत योजना के तीन प्रमुख हिस्से

इस योजना के तीन प्रमुख हिस्से हैं। पहले हिस्से के तहत निर्यात दायित्व विस्तार शामिल है। अग्रिम अनुमति और ईपीसीजी अनुमति (जो एक मार्च से 31 मई, 2026 के बीच देय हैं) का स्वतः विस्तार 31 अगस्त तक बिना किसी जुर्माने के किया जाएगा। यह 14 फरवरी से 15 मार्च तक की तत्काल एक माह की अवधि में ईसीजीसी के जरिये पहले से बीमित खेपों की सुरक्षा करता है।

एमएसएमई निर्यातकों को विशेष राहत

तीसरा हिस्सा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) को अधिभार के झटकों से बचाने के लिए बनाया गया है। यह 14 फरवरी से 14 मार्च तक एक महीने की अवधि में असाधारण ढुलाई और बीमा लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति करता है। यह उन एमएसएमई निर्यातकों पर लागू होता है, जिन्होंने ईसीजीसी कवरेज नहीं लिया है।

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