प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

यूपी में टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों के प्रबंधन...

यूपी में टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों के प्रबंधन को केंद्र की मंजूरी

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बहराइच और पीलीभीत वन प्रभाग में रिजर्व फारेस्ट से बाहर निकल कर आबादी में विचरण करने वाले बाघों के प्रबंधन के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।

यूपी में टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों के प्रबंधन को केंद्र की मंजूरी

फाइल फोटो |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बहराइच और पीलीभीत वन प्रभाग में रिजर्व फारेस्ट से बाहर निकल कर आबादी में विचरण करने वाले बाघों के प्रबंधन के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार ने यूपी में टाइगर रिजर्व के बाहर आने वाले बाघों के प्रबंधन के लिए परियोजना को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार द्वारा मंजूर इस योजना के तहत प्रत्येक वन प्रभाग में आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षण और प्रबंधन के लिए 90 लाख रुपये दिए जाएंगे। इस संबंध में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने सोमवार को हरी झंडी दे दी। इससे आबादी वाले क्षेत्र में मानव और हिंसक जानवरों के बीच संघर्ष पर विराम लगेगा।

परियोजना के शीघ्र संचालन के लिए वन विभाग से एपीओ भेजने के निर्देश

केन्द्र सरकार ने वन विभाग से परियोजना के शीघ्र संचालन के लिए वार्षिक कार्ययोजना (एपीओ) भेजने का निर्देश दिया है। बाघों के आबादी में आने की समस्या से जूझ रहे यूपी, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान समेत 9 राज्यों के 40 वन प्रभागों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस परियोजना को चालू वित्त वर्ष में ही शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के तहत बाघों के नए क्षेत्रों में फैलाव व जीन प्रवाह पर सघन निगरानी रखी जाएगी। जीन प्रवाह से मतलब उनके आवागमन के पैटर्न से है, जो दिखाता है कि बाघ स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल ढल जाते हैं। पिंजड़ों, कैमरा ट्रैपिंग, रेस्क्यू उपकरण, कॉलर आईडी और वाहनों की व्यवस्था भी इस योजना के तहत की जाएगी। एनटीसीए इसके लिए यूपी को कुल 3.60 करोड़ रुपये देगा।

यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/ancestral-property-will-be-registered-for-just-rs-10-thousand-rupeese-in-up/103836

यूपी में अब सिर्फ दस हजार में होगी पैतृक संपत्ति की रजिस्ट्री

Related to this topic: