पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को भ्रामक बताया है।
नई दिल्ली: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को भ्रामक बताया है। मंत्रालय ने कहा कि वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण और करोड़ों वाहनों के वास्तविक उपयोग के बाद भी E20 ईंधन से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
सरकार ने दी वैज्ञानिक परीक्षणों की जानकारी
मंत्रालय ने कहा कि E20 ईंधन को लागू करने का फैसला 25 वर्षों से अधिक के चरणबद्ध अनुभव, वैज्ञानिक जांच, वाहन निर्माताओं के डेटा और लगातार निगरानी के आधार पर लिया गया है। सरकार के अनुसार, E15-प्लस पेट्रोल साढ़े तीन साल से अधिक समय से इस्तेमाल में है, जबकि E19-E20 ईंधन ढाई साल से ज्यादा समय से बाजार में उपलब्ध है।
करोड़ों वाहन E20 पर चल रहे
केंद्र ने बताया कि 2 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन ईंधन मिश्रणों पर सफलतापूर्वक चल रही हैं और अब तक किसी बड़ी प्रणालीगत खराबी की पुष्टि नहीं हुई है। पुराने वाहनों को लेकर उठ रही चिंताओं पर मंत्रालय ने एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी के सर्विस रिकॉर्ड का हवाला दिया। इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की गई, जिनमें करीब 1.5 करोड़ वाहन E20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। मंत्रालय ने कहा कि इन वाहनों में E20 से जुड़ी जंग, असामान्य घिसाव या पुर्जों की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या नहीं मिली।
माइलेज में कमी को बताया सामान्य
मंत्रालय ने ईंधन दक्षता को लेकर कहा कि कुछ पुराने E10 डिजाइन वाले वाहनों में माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि, इसका कारण इथेनॉल का कम कैलोरी मान है, न कि इंजन को नुकसान। सरकार ने कहा कि टायर प्रेशर, ड्राइविंग की आदतें, ट्रैफिक और वाहन का रखरखाव भी माइलेज को काफी प्रभावित करते हैं।
सोशल मीडिया दावों पर उठाए सवाल
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) निदेशक अनिरुद्ध भालचंद्र ने कहा कि सोशल मीडिया पर E20 को लेकर फैलाई जा रही कई चिंताएं वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इथेनॉल के कारण माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन इसे इंजन खराब होने से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने नियमित सर्विसिंग और पुराने रबर पार्ट्स को समय पर बदलने की सलाह दी।
कई संस्थाओं से सलाह के बाद लागू हुआ E20
मंत्रालय ने बताया कि E20 को लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), कंपोनेंट निर्माताओं और तेल कंपनियों से परामर्श लिया गया था। सरकार ने कहा कि वाहन निर्माता अभी भी E20 ईंधन से संबंधित वाहनों की वारंटी का पालन कर रहे हैं, जो इसकी अनुकूलता में उनके भरोसे को दर्शाता है।
(एएनआई)
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