कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पुलिस के सीआईडी अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के हस्तक्षर के मामले में पार्टी के ...
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पुलिस के सीआईडी अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के हस्ताक्षर के मामले में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी से पूछताछ के लिए हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास पहुंचे, लेकिन उस समय अभिषेक बनर्जी मौजूद नहीं थे। सीआईडी अधिकारियों को निराश वापस लौटना पड़ा।
तृणमूल विधायकों की ओर से विधानसभा सचिवालय को शोभनदेव चट्टोपाध्याय को तृणमूल विधायक दल के नेता के रूप में स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। विधानसभा सचिवालय को विधायकों के हस्ताक्षर को लेकर संदेह हुआ। विधानसभा सचिवालय ने इस बारे में हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उसी शिकायत के आधार पर सीआईडी के अधिकारी पता रहे हैं कि किन-किन विधायकों का हस्ताक्षर खुद का किया गया है और किन विधायकों के हस्ताक्षर खुद का किया हुआ नहीं है।
सीआईडी सबसे पहले तृणमल कांग्रेस की विधायक नयना बंद्योपाध्याय के यहां गई। उसके बाद वह तापस माइती और बाहारूल इसलाम के यहां पहुंची। इतना ही नहीं वह पार्टी के प्रवक्ता व विधायक कुणाल घोष के यहां गई और उसके बाद पूर्व मंत्री व मौजूदा विधायक चंद्रनाथ सिन्हा के यहां भी गई। पहली बार विधायक हुए युवा बरारूल इसलाम ने पूछताछ के दौरान सीआईडी को बताया कि वे 6 मई को पार्टी के विधायकों की बैठक में नहीं थे, बल्कि अपने आवास पर थे।
उनके बयान से हस्ताक्षर का मामला और विवादास्पद हो गया है। सूत्रों के अनुसार, विधानसभा सचिवालय की ओर से शपथ लेने के वक्त का तृणमूल विधायकों के हस्ताक्षर और विपक्षी दल के नेता के चुने जाने के प्रस्ताव में किए गए हस्ताक्षर का मिलान करने पर विवाद उपजा है। तृणमूल विधायकों का कहना है कि जब वे सभी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को अपना नेता मानते हैं तो इस पर विधानसभा सचिवालय केवल तकनीकी आधार पर क्यों विवाद खड़ा कर रहा है। वह विपक्षी दल के नेता को उनका कक्ष नहीं देकर पक्षपात कर चुका है। उनका मानना है कि तृणमूल विधायकों को परेशान करने के तहत यह सब हो रहा है।
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