अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में गंभीर रक्त विकार (आईटीपी) से पीड़ित महिला का टोटल हिप रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक किया गया। इसके लिए विभागों के समन्वय से एक बहु-विषयक उपचार योजना तैयार की गई।
गांधीनगर: अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने एक और जटिल, उच्च जोखिम वाली सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की है, जो सरकारी अस्पतालों में सुलभ, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा और उन्नत उपचार के प्रति गुजरात सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि अस्थि रोग विभाग ने गंभीर रक्त विकार आईटीपी (इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्पुरा) से पीड़ित एक मरीज की टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की।
एक बार फिर साबित हुई सरकारी अस्पताल की उपलब्धि
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि सरकारी अस्पताल विश्व स्तरीय, अत्यंत जटिल चिकित्सा उपचार सफलतापूर्वक प्रदान करने में सक्षम हैं। सिविल अस्पताल के अस्थि रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीयूष मित्तल ने बताया कि उत्तर प्रदेश निवासी संगीता त्रिवेदी लंबे समय से इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्पुरा (आईटीपी) नामक एक गंभीर रक्त विकार से पीड़ित थीं। आईटीपी के मरीजों में प्लेटलेट काउंट बहुत कम होने के कारण सर्जरी में गंभीर रक्तस्राव का खतरा अधिक होता है। प्लेटलेट्स रक्त के थक्के जमने और अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए आवश्यक होते हैं, इसलिए ऐसे रोगियों में कोई भी शल्य चिकित्सा करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा होता है।
कूल्हे के जोड़ को पहुंची थी गंभीर क्षति
संगीता त्रिवेदी लंबे समय से आईटीपी (आंतों की सूजन) का इलाज करा रही थीं। इलाज के दौरान लंबे समय तक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से उन्हें एवास्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) हो गया, जिससे उनके कूल्हे के जोड़ को गंभीर क्षति पहुंची। नजीता ये रहा कि उनकी गतिशीलता को बहाल करने और उन्हें फिर से चलने में मदद करने के लिए टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) ही एकमात्र विकल्प था। संगीता त्रिवेदी ने कई निजी अस्पतालों से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि सर्जरी की लागत 3 लाख से 5 लाख रुपये के बीच होगी। आईटीपी और सर्जरी के दौरान जानलेवा रक्तस्राव के उच्च जोखिम के कारण अस्पताल यह प्रक्रिया करने में हिचकिचा रहे थे। सभी विकल्पों को आजमाने के बाद वह अहमदाबाद सिविल अस्पताल आईं।
विभागों के समन्वय से एक बहु-विषयक उपचार योजना की गई तैयार
प्रोफेसर डॉ. पीयूष मित्तल और उनकी टीम ने विस्तृत मूल्यांकन किया और हेमेटोलॉजी, एनेस्थीसिया और ब्लड बैंक विभागों के समन्वय से एक बहु-विषयक उपचार योजना तैयार की गई। इस व्यापक योजना के आधार पर टीम ने सर्जरी करने का निर्णय लिया। सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. शकुंतला और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मरीज को रक्तस्राव के जोखिम को नियंत्रित करने के लिए 5 यूनिट प्लेटलेट्स, 1 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) और 1 यूनिट पैक्ड सेल वॉल्यूम (PCV) दिया गया।
सफलतापूर्वक संपन्न हुई टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी
परिणामस्वरूप, अपेक्षित रक्तस्राव को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया और टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर है। कूल्हे के गंभीर दर्द से मुक्त होकर वह अब स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने और अपने दैनिक कार्यों को आसानी से करने में सक्षम है। गंभीर बीमारी और लंबे समय तक दर्द झेलने के बाद सफल सर्जरी ने उनकी चलने-फिरने की क्षमता, आत्मनिर्भरता और बेहतर जीवन की उम्मीद को फिर से जगा दिया है।
(एएनआई)
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