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स्मार्ट कार्ड के नाम पर ₹200 की वसूली, लेकिन मिल रहा सिर्फ ई-कार्ड

​भोपाल। ​मध्य प्रदेश परिवहन विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में है। विभाग पर आरोप है कि...

स्मार्ट कार्ड के नाम पर ₹200 की वसूली लेकिन मिल रहा सिर्फ ई-कार्ड

स्मार्ट कार्ड के नाम पर ₹200 की वसूली, लेकिन मिल रहा सिर्फ ई-कार्ड |

​भोपाल। ​मध्य प्रदेश परिवहन विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में है। विभाग पर आरोप है कि वह प्रदेश की जनता से ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण कार्ड (RC) के नाम पर ₹200 का स्मार्ट कार्ड शुल्क वसूल रहा है, लेकिन बदले में नागरिकों को भौतिक प्लास्टिक कार्ड के बजाय केवल मोबाइल पर 'ई-कार्ड' (PDF) थमाया जा रहा है।

यह है विवाद

​परिवहन विभाग का एक निजी कंपनी के साथ स्मार्ट कार्ड छपाई का टेंडर जून 2024 में समाप्त हो गया था। तब से लेकर अब तक नई छपाई व्यवस्था ठप पड़ी है। बावजूद इसके, आरटीओ (RTO) कार्यालयों में आवेदकों से स्मार्ट कार्ड की पूरी फीस ली जा रही है। नागरिकों का कहना है कि जब कार्ड की छपाई ही नहीं हो रही तो यह शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा है?

​जनता के साथ स्मार्ट ठगी

विभाग प्रति आवेदक ₹200 वसूल रहा है, जबकि नागरिकों को केवल डिजिटल ई-कार्ड भेजा जा रहा है। इसे जनता के साथ 'स्मार्ट ठगी' कहा जा रहा है। जून 2024 से स्मार्ट चिप कंपनी का टेंडर खत्म होने के बाद विभाग नई व्यवस्था लागू करने में विफल रहा है।

बढ़ रही है आम आदमी की परेशानी

लोग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें जवाब मिलता है कि प्रिंटिंग बंद है। कई जगह बोर्ड भी लगा दिए गए हैं कि "स्मार्ट कार्ड प्रिंटिंग बंद है, केवल ई-कार्ड ही मान्य है।"

​विधानसभा में भी उठा मुद्दा

यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है। विपक्ष के हमलों के बाद परिवहन मंत्री ने जल्द व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

आम आदमी और विभाग की बात

परिवहन कार्यालयों में मौजूद आवेदकों का कहना है कि बिना भौतिक कार्ड के कई बार ट्रैफिक पुलिस के साथ चेकिंग के दौरान बहस हो जाती है। डिजिटल कार्ड दिखाने पर भी कई बार असुविधा का सामना करना पड़ता है। एक आक्रोशित आवेदक ने कहा, स्मार्ट कार्ड के ₹200 लिए, पर सिर्फ ई-कार्ड दिया! यह स्मार्ट ठगी है!

​दूसरी ओर, विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि डिजिटल ई-कार्ड कानूनी रूप से मान्य है और तकनीकी दिक्कतों के कारण छपाई में देरी हो रही है। हालांकि, शुल्क वसूली जारी रहने के सवाल पर अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

​टूट रहा सब्र का बांध

2024 से चल रहा यह सिलसिला अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रहा है। लोग मांग कर रहे हैं कि या तो विभाग तुरंत कार्ड की छपाई शुरू करे या फिर स्मार्ट कार्ड के नाम पर ली जा रही अतिरिक्त फीस को तत्काल प्रभाव से बंद करे।

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