लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लंबे इंतजार के बाद राज्य के नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में पार्षदों को नामित कर दिया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लंबे इंतजार के बाद राज्य के नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में पार्षदों को नामित कर दिया है। मई 2023 में राज्य में हुए नगर निकाय चुनाव के करीब तीन साल बाद राज्य में पार्षदों के नामांकन हुए है। प्रदेश भाजपा संगठन की संस्तुति पर योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर पार्षद नामित किये गये हैं। सरकार के इस कदम यूपी में अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं का असंतोष कम करने और पार्टी मशीनरी को चुस्त दुरूस्त करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
761 निकायों में 2802 सदस्यों को मिली जगह
नगर विकास विभाग की ओर से जारी सूची के अनुसार प्रदेश के कुल 761 नगर निकायों में 2802 सदस्यों को नामित किया गया है। इनमें नगर निगमों में 10-10, नगर पालिका परिषद में 5-5 और नगर पंचायतों में 3-3 सदस्य नामित किए गए हैं। प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद ने नगर पालिका अधिनियम, 1916 के प्रावधानों के आधार पर इन सदस्यों को नामित करने संबंधी अधिसूचना सोमवार को जारी कर दी। अधिसूचना के अनुसार नामित सदस्यों को निकायों में सदस्यता ग्रहण कराई जाएगी, जिसके बाद वे सदन की कार्यवाही में भाग ले सकेंगे। हालांकि अधिसूचना में उनके कार्यकाल की अवधि स्पष्ट नहीं की गई है।
नामित सदस्यों को भी मिलेंगे अधिकार
मालूम हो कि राज्य सरकार के सुझाव पर नगर निकायों में सदस्यों को नामित किया जाता है। निर्वाचित पार्षदों की तरह इन्हें भी सदन में बैठने का अधिकार होता है और जनहित के मुद्दों पर इनसे राय ली जाती है। नगर निगम प्रशासन चाहे तो मेयर के सुझाव पर विकास निधि में नामित सदस्यों का कोटा भी निर्धारित कर सकता है, जिसके आधार पर विकास कार्य कराए जाते हैं।
नगर निगम, पालिका और पंचायत में बंटवारा
प्रदेश में वर्तमान में 17 नगर निगम हैं। प्रत्येक नगर निगम में 10-10 सदस्यों के हिसाब से कुल 170 सदस्य नामित किए गए हैं। वहीं 200 नगर पालिका परिषदों में 5-5 सदस्यों के अनुसार 1000 सदस्य नामित हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश की 544 नगर पंचायतों में 3-3 सदस्यों के हिसाब से 1632 सदस्य नामित किए गए हैं। इस प्रकार कुल 2802 सदस्यों को नामित किया गया है।
चुनावी रणनीति से जुड़ा फैसला
प्रदेश में करीब तीन साल बाद पार्षदों का नामांकन हुआ है। मई 2023 में हुए नगर निकाय चुनाव के बाद से ही भाजपा के कई कार्यकर्ता पार्षद नामित होने की बाट जोह रहे थे। हालांकि राजनीतिक कारणों से प्रदेश संगठन ने इस प्रक्रिया को लगभग तीन वर्षों तक टाल दिया। अब संभावित पंचायत चुनाव और अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बदलाव के साथ-साथ निकायों, निगमों और बोर्डों में रिक्त पदों पर कार्यकर्ताओं को नामित किया गया है।
सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश
राज्य सरकार द्वारा इस नामांकन से साफ है कि सत्तारूढ़ भाजपा ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। पार्षदों के मनोनयन में जिस तरह जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधा गया है, उससे साफ है कि इसके जरिए समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की काट तैयार की जा रही है। चुनावी तैयारियों में जुटी भाजपा और सरकार के आपसी समन्वय से तैयार की गई सूची ने लंबे समय से हताश और निराश चल रहे पार्टी कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जगा दी है।
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