दिल्ली पुलिस ने शेल कंपनियों के जरिए चल रहे एक बड़े साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने शेल कंपनियों के जरिए चल रहे एक बड़े साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में देशभर में फैले साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े करीब 180 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। यह कार्रवाई ऑपरेशन साइ-हॉक (Operation Cy-Hawk) के तहत की गई, जिसे संगठित साइबर ठगी नेटवर्क को तोड़ने और ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने वाले अवैध वित्तीय चैनलों पर रोक लगाने के लिए शुरू किया गया था।
एक बैंक खाता बार-बार ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए हो रहा था इस्तेमाल
नई दिल्ली जिला साइबर पुलिस स्टेशन के अनुसार, इस अभियान में म्यूल अकाउंट्स, नकदी संभालने वालों और उन शेल कंपनियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिन्हें साइबर ठगी से प्राप्त धन को सफेद करने के लिए बनाया गया था। जांच के दौरान जिले में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कई स्थानों की पहचान की गई। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जांच में सामने आया कि एक बैंक खाता बार-बार ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल हो रहा था। यह खाता कन्नॉट प्लेस स्थित एम/एस कुद्रेमुख ट्रेडिंग (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज था।
इन कंपनियों से होकर गुजरी थी करीब 180 करोड़ रुपये की रकम
पुलिस के अनुसार, इस खाते में म्यूल अकाउंट के सभी लक्षण पाए गए और कई शिकायतें संगठित साइबर अपराध की ओर इशारा कर रही थीं। इस संबंध में 19 नवंबर 2025 को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि कंपनी का खाता राजेश खन्ना के नाम पर खोला गया था। बाद में उसने खुलासा किया कि वह सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा के निर्देश पर काम कर रहा था। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी फंड ट्रांसफर को नियंत्रित करते थे और उन्होंने कथित तौर पर 20 शेल कंपनियां खोलकर ठगी की रकम को इधर-उधर किया। आगे की जांच में लगभग 176 साइबर फ्रॉड शिकायतों से इन कंपनियों का संबंध पाया गया, जिनमें करीब 180 करोड़ रुपये की रकम कई स्तरों के जरिए इन कंपनियों से होकर गुजरी थी।
नोटिस के बावजूद पेश ना होने पर पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस ने बताया कि राजेश खन्ना की बाद में नोएडा में मृत्यु हो गई। शेष आरोपी सुशील चावला और राजेश कुमार ने शुरुआत में जांच में सहयोग किया, लेकिन बाद में नोटिस मिलने के बावजूद पेश नहीं हुए और जांच से बचते रहे। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। डिजिटल साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि खन्ना को कथित तौर पर मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया था। आरोपियों ने पश्चिम बंगाल में इसी तरह के मामलों से जुड़े एक व्यक्ति से संबंध होने का भी दावा किया है। पुलिस ने दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए हैं। इन उपकरणों और बैंक खातों की भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के साथ मिलकर देशभर में लिंक की जांच की जा रही है।
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