बैतूल जिले के ग्रामीण क्षेत्र के तीन आदिवासी परिवारों ने अपनी कृषि भूमि के सीमांकन (नाप-जोख) को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से न्याय की मांग की है।
बैतूल (मध्यप्रदेश)। बैतूल जिले के ग्रामीण क्षेत्र के तीन आदिवासी परिवारों ने अपनी कृषि भूमि के सीमांकन (नाप-जोख) को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से न्याय की मांग की है। आवेदकों का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने और निर्धारित तिथि पर मौके पर उपस्थित रहने के बावजूद अब तक उनकी भूमि का सीमांकन नहीं किया गया है।
बंटवारे के बाद भी लंबित है सीमांकन प्रक्रिया
आवेदक लीला पति अलीसा (55 वर्ष), मानता पति अलीसा (57 वर्ष) निवासी सोंधा तथा शांता पत्नी अलीसा (60 वर्ष) निवासी साईंखुर्दरा तहसील बैतूल ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उनकी कृषि भूमि का राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज बंटवारा हो चुका है। इसके बाद उन्होंने सीमांकन के लिए 19 मई 2026 को आवेदन प्रस्तुत किया था। इसकी सूचना राजस्व निरीक्षक कार्यालय बैतूल बाजार द्वारा संबंधित पक्षों को भेजी गई थी।
निर्धारित तिथि पर मौके पर नहीं पहुंचे अधिकारी
आवेदकों के अनुसार 3 जून 2026 को सुबह 11 बजे सीमांकन की तिथि निर्धारित की गई थी। वे निर्धारित समय पर अपनी भूमि पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक मौजूद रहे, लेकिन हल्का पटवारी मौके पर नहीं पहुंचे। बाद में संपर्क करने पर पटवारी ने समयाभाव का हवाला देते हुए सीमांकन नहीं होने की बात कही और 9 जून को सीमांकन कराने का आश्वासन दिया।
जल्द सीमांकन की मांग पर अड़े ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि 9 जून को भी सीमांकन नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि दूसरे पक्ष द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में अपील दायर की गई है, जिसके चलते सीमांकन की प्रक्रिया रोक दी गई है। आवेदकों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में किसी प्रकार का आदेश या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। पीड़ितों ने कलेक्टर से मांग की है कि उनकी कृषि भूमि का जल्द सीमांकन कराकर उन्हें न्याय दिलाया जाए, ताकि लंबे समय से चल रही परेशानी का समाधान हो सके।
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