दिल्ली जिमखाना क्लब के एक सदस्य ने केंद्र सरकार पर बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए क्लब को उसके सफदरजंग रोड परिसर से ज़बरन निकालने की कोशिश का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली। दिल्ली जिमखाना क्लब के एक सदस्य ने केंद्र सरकार पर बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए एग्जीक्यूटिव नोटिस के ज़रिए क्लब को उसके ऐतिहासिक सफदरजंग रोड परिसर से ज़बरदस्ती निकालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। क्लब के सदस्य ने सरकार के 27.3 एकड़ की प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करने के इस कदम को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।
नोटिस के आधार पर उठाए गए सवाल
मुकदमे में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा 22 मई को 1928 के परपेचुअल लीज़ डीड के तहत री-एंट्री क्लॉज़ को लागू करने वाला नोटिस "रक्षा अवसंरचना", "सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों" और "शासन अवसंरचना" के "अस्पष्ट और सामान्यीकृत" संदर्भों पर आधारित है। इसमें किसी विशिष्ट सार्वजनिक परियोजना, तात्कालिकता, मूल्यांकन या संपत्ति पर पुनः कब्जा करने को उचित ठहराने वाली सामग्री का खुलासा नहीं किया गया है।
मुआवज़ा दिए बिना बेदखली का आरोप
लंबे समय से सदस्य रहे विजय खुराना द्वारा दायर की गई शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि सरकार ने सदियों पुराने पट्टे और स्वामित्व अधिकारों को समाप्त करने की मांग के बावजूद, जमीन, भुगतान किए गए प्रीमियम या परिसर में खड़ी इमारतों और संरचनाओं के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया है। इस मुकदमे में केंद्र पर कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय "कार्यकारी बल, प्रशासनिक आदेश और पुलिस शक्ति के खतरे/प्रयोग के माध्यम से जबरन बेदखली" करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया गया है।
हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने सोमवार को न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए मुकदमे की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। न्यायालय ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई है। भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ), आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया गया है। (एएनआई)
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