दिल्ली HC ने यमुना में बिना उपचारित सीवेज बहने पर चिंता जताई और प्रदूषण रोकने के लिए सीवेज प्रबंधन की खामियां दूर करने के निर्देश दिए।
नई दिल्ली [भारत]: दिल्ली उच्च न्यायालय ने यमुना में बिना उपचारित सीवेज के लगातार बहने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि नदी के और अधिक प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली की सीवेज प्रबंधन प्रणाली में कई खामियों को दूर करने की आवश्यकता है। न्यायालय ने ओखला स्थित खुले अबुल फजल नाले की स्थिति पर भी कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह बिना किसी सुरक्षा के बह रहा है और निवासियों तथा यात्रियों के लिए "गंभीर सुरक्षा खतरा" पैदा कर सकता है।
सीवेज सीधे यमुना में न पहुंचने देने का निर्देश
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने 24 अगस्त के एक आदेश में अधिकारियों को सीवेज उपचार, जल निकासी और औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास से संबंधित उपायों को तेज करने का निर्देश दिया। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि बिना उपचारित सीवेज सीधे यमुना में नहीं पहुंचना चाहिए।
एसटीपी से जुड़े चार प्रमुख मुद्दे
न्यायालय ने सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) से संबंधित चार प्रमुख मुद्दों की पहचान की। इनमें मौजूदा संयंत्रों का उन्नयन, उनकी क्षमता बढ़ाना, नए एसटीपी स्थापित करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि उपचारित पानी यमुना में पहुंचने से पहले दोबारा बिना उपचारित सीवेज के साथ न मिले। पीठ ने विशेष रूप से स्थानीय आयुक्तों की रिपोर्टों पर ध्यान दिया कि केवल कुछ सीवेज का ही उपचार किया जा रहा था, जबकि अन्य सीवेज बिना उपचार के नदी में बह रहा था।
13 नए विकेंद्रीकृत एसटीपी का प्रस्ताव
न्यायालय ने दर्ज किया कि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने इस समस्या के समाधान के लिए 328 एमजीडी की संयुक्त क्षमता वाले 13 विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इन प्रस्तावित संयंत्रों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर नमामि गंगा परियोजना प्राधिकरण को भेज दी गई है। न्यायालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक को इस प्रस्ताव पर विचार करने का निर्देश दिया।
दिल्ली में 28 उन्नत एसटीपी मौजूद
न्यायालय को बताया गया कि दिल्ली में वर्तमान में 735 एमजीडी की संयुक्त क्षमता वाले 28 उन्नत सीवेज उपचार संयंत्र हैं, जो राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित 10/10 मानक पर काम कर रहे हैं। नौ अन्य सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन कार्य चल रहा है और वे वर्तमान में 30/50 मानक पर काम कर रहे हैं। इस कार्य को दिसंबर 2027 से मई 2028 के बीच पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 28 के लिए ठेके दिए जा चुके हैं, जबकि एक टेंडर प्रक्रिया में है। इनका निर्माण जनवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
उपचारित पानी के दोबारा दूषित होने पर चिंता
पीठ ने एक अन्य महत्वपूर्ण चिंता को उजागर किया कि उपचारित पानी अनुपचारित सीवेज के साथ मिल सकता है। बेंच ने निर्देश दिया कि मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों और नए प्रस्तावित संयंत्रों दोनों के लिए कार्यों की योजना बनाते समय उपचारित पानी ले जाने वाली नालियों को "सर्वोच्च प्राथमिकता" दी जानी चाहिए। डीजेबी ने बताया कि 24 अगस्त, 2026 तक मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कुल क्षमता 814.26 एमजीडी थी और इसका लक्ष्य 31 दिसंबर, 2027 तक इसे बढ़ाकर 1,041.10 एमजीडी करना है। परियोजना रिपोर्ट और धन की उपलब्धता के आधार पर आगे और संयंत्र भी चालू किए जा सकते हैं।
खुले अबुल फजल नाले पर कोर्ट ने जताई 'अत्यधिक चिंता'
ओखला क्षेत्र में जलभराव की जांच करते हुए न्यायालय ने अबुल फजल नाले की तस्वीरों का अवलोकन करने के बाद "अत्यधिक चिंता" व्यक्त की। तस्वीरों में पर्याप्त सुरक्षा के बिना खुला नाला बहता हुआ दिखाई दे रहा था। पीठ ने कहा कि बिना विभाजक दीवार या आवरण के खुला नाला निवासियों और यात्रियों के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकता है।
MCD को विभाजक दीवार बनाने का निर्देश
न्यायालय ने पहले एमसीडी को नाले और वाहनों के आवागमन वाली सड़क के बीच एक विभाजक दीवार बनाने और पैदल यात्रियों तथा चालकों को नाला दिखाई देने के लिए परावर्तक और बत्तियां लगाने का निर्देश दिया था। एमसीडी ने न्यायालय को बताया कि बत्तियां और परावर्तक पहले ही लगाए जा चुके हैं, लेकिन विभाजक दीवार का निर्माण नहीं किया गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने एनओसी जारी नहीं की है। न्यायालय ने गौर किया कि एमसीडी ने एनओसी के लिए संबंधित कार्यकारी अभियंता को 24 अप्रैल, 12 मई और 3 जुलाई, 2026 को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। यह भी बताया गया कि विभाजक दीवार के लिए बजट पहले ही स्वीकृत किया जा चुका है।
खुले नाले को स्लैब से ढकने का आदेश
स्थानीय निवासियों के लिए खतरे को देखते हुए बेंच ने एमसीडी को निर्देश दिया कि वह बिना किसी और एनओसी की प्रतीक्षा किए, कानून के अनुसार आवश्यक होने पर विभाजक दीवार का निर्माण करे और खुले नाले को स्लैब से ढके। न्यायालय ने एमसीडी को नाले की निरंतर गाद सफाई और आसपास के क्षेत्र की सफाई करने का भी निर्देश दिया। तस्वीरों में नाले के अंदर और आसपास बड़ी मात्रा में कूड़ा-कचरा दिखाई दे रहा था।
27 गैर-अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास पर जोर
न्यायालय ने 27 गैर-अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास पर भी विचार किया और कहा कि यमुना में अनुपचारित सीवेज न बहे और जलभराव को खत्म करने के लिए इनका पुनर्विकास "अत्यंत आवश्यक" है। ऐसे 25 क्षेत्रों की योजनाएं डीएसआईआईडीसी, एमसीडी और डीडीए के बीच भेजी गई हैं, लेकिन कुछ मास्टर प्लान मानदंडों में छूट के अनुरोधों के कारण प्रक्रिया गतिरोध में फंस गई है।
31 अगस्त को अधिकारियों की बैठक के निर्देश
बेंच ने डीडीए के अतिरिक्त आयुक्त (योजना) मनीष वर्मा को 31 अगस्त को सभी संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने और योजनाओं की मंजूरी तथा आवश्यक छूटों पर विचार करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तैयार करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने पाया कि ये औद्योगिक समूह कई दशकों से उचित बुनियादी ढांचे या योजना के बिना मौजूद हैं और कहा कि नए मास्टर प्लान के तहत नई शर्तें लागू करना "पूरी तरह से अव्यावहारिक" होगा। न्यायालय ने डीडीए से व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया, ताकि इन क्षेत्रों में नालियों, पानी की पाइपलाइनों और सीवेज लाइनों सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा सके।
समयपुर बादली के लिए नई पुनर्विकास योजना
समयपुर बादली के मामले में न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पूरे क्षेत्र का सीमांकन करते समय और नई पुनर्विकास योजना तैयार करते समय बाद की क्षेत्रीय योजनाओं और अधिसूचनाओं पर विचार करें। 2 सितंबर को एक बैठक निर्धारित की गई है, जिसके बाद संबंधित एजेंसी को तीन महीने के भीतर नई योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
फिरनी रोड मामले में 31 अगस्त तक मांगी टिप्पणियां
फिरनी रोड के मामले में न्यायालय ने संबंधित औद्योगिक संघों को 31 अगस्त तक अपनी टिप्पणियां प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। पुनर्विकास योजना को अंतिम रूप देकर 30 सितंबर तक एमसीडी को प्रस्तुत किया जाना है। न्यायालय अगली सुनवाई 25 सितंबर, 2026 को सार्वजनिक अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और जल एवं वायु प्रदूषण के बीच परस्पर संबंध से संबंधित मुद्दों पर करेगा।
(एएनआई)
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