दिल्ली पुलिस ने 12 दिनों की सघन तलाशी के बाद एक हथियारबंद लूट के मामले को सुलझा लिया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने 12 दिनों की सघन तलाशी के बाद एक हथियारबंद लूट के मामले को सुलझा लिया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह मामला कुलदीप शर्मा की शिकायत के बाद शुरू हुआ। कुलदीप शर्मा ने 23 फरवरी को शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन के पास बंदूक की नोक पर 23 लाख रुपये से भरा एक बैग लूटे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता के बयान के आधार पर सराय रोहिल्ला थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
CCTV में दो संदिग्धों की हुई पहचान
पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों से मिले CCTV फुटेज में दो संदिग्धों को एक मोटरसाइकिल पर पीड़ित का पीछा करते हुए देखा। उन्होंने पीड़ित का पीछा उस जगह से शुरू किया था, जहां से पीड़ित ने नकदी ली थी। आगे की जांच से पता चला कि शुरू में तीन संदिग्ध केशव पुरम में एक साथ थे, जिसके बाद उनमें से एक समूह से अलग हो गया। टीम ने इस तीसरे संदिग्ध को CCTV फुटेज के जरिए रामपुर से कन्हैया नगर मेट्रो स्टेशन तक और अंततः तीस हजारी तक ट्रैक किया। संदिग्ध की तस्वीरें निकाली गईं जिसकी पहचान राजस्थान के सिरोही जिला निवासी कालाराम के रूप में हुई।
मोनू की गिरफ्तारी और सबूत बरामद
हालांकि, कालाराम के राजस्थान स्थित ठिकाने पर की गई छापेमारी में वह फरार मिला, लेकिन पुलिस ने स्थानीय निवासियों से उसका मोबाइल नंबर लिया। इसके बाद CDR और IPDR विश्लेषण के आधार पर जांचकर्ता 'मोनू' नामक एक सहयोगी तक पहुंचे। 9 मार्च को, एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने दिल्ली के भलस्वा डेयरी इलाके से मोनू को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से एक पिस्तौल, एक जिंदा कारतूस और 3.95 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
संदीप और सागर की गिरफ्तारी
पूछताछ के दौरान, मोनू ने खुलासा किया कि लूट की वारदात को उसके सहयोगियों - संदीप और सागर - ने अंजाम दिया था, जबकि उसने और कालाराम ने मिलकर इसकी योजना बनाई थी। संदीप के CDR/IPDR के विश्लेषण से पता चला कि वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और छिपने के ठिकाने बदल रहा था। आखिरकार, 19 मार्च को पुलिस ने उसे मंगोलपुरी इलाके से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 5 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई। संदीप से मिली जानकारी के आधार पर, उसके सह-आरोपी सागर को भी गिरफ्तार कर लिया गया, और उसके कब्जे से 7 लाख रुपये बरामद किए गए।
कालाराम की भूमिका और लूट की योजना
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि कालाराम - जो अभी भी फरार है - ने ही नकदी के संबंध में टिप (गुप्त सूचना) दी थी। मोनू और कालाराम ने मिलकर यह योजना बनाई, जिसमें मोनू ने मोटरसाइकिल और पिस्तौल का इंतज़ाम किया। संदीप को लूट की वारदात को अंजाम देने का काम सौंपा गया, जिसके लिए वह अपने दोस्त सागर को साथ ले आया। दोनों ने शिकायतकर्ता का पीछा कलेक्शन पॉइंट से शुरू किया और मेट्रो स्टेशन के पास बंदूक की नोक पर उससे नकदी लूट ली। फिलहाल, पुलिस ने लूटी गई रकम में से ₹15.95 लाख बरामद कर लिए हैं। मामले में आगे की जाँच जारी है और मुख्य आरोपी कालाराम को पकड़ने तथा बाकी बची नकदी बरामद करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
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