उत्तराखंड में देवभूमि परिवार अधिनियम-2026 लागू हो गया है। प्रदेश में रहनेवाले सभी परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी दी जाएगी।
देहरादून: उत्तराखंड में अब हर परिवार की एक अलग पहचान होगी। राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही प्रदेश में देवभूमि परिवार अधिनियम-2026 लागू हो गया है। इसके तहत राज्य में रहने वाले परिवारों का एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी दी जाएगी।
डेटा से छेड़छाड़ पर 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना
प्रदेश में 15 वर्ष या उससे अधिक समय से रह रहे परिवार ही यूनिक फैमिली आई के पात्र होंगे। डेटा से छेड़छाड़ या सेंधमारी करने पर 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। परिवार की सबसे वरिष्ठ 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला मुखिया होगी। परिवार में महिला के नहीं होने पर सबसे वरिष्ठ पुरुष अस्थायी मुखिया बनेगा।
सरकार का दावा- योजनाओं में बढ़ेगी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में देवभूमि परिवार प्राधिकरण का गठन होगा। प्रत्येक जिले में अपर जिलाधिकारी स्तर का अधिकारी निगरानी करेगा। सरकार का दावा है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। फर्जीवाड़ा रुकेगा और पात्र लोगों तक लाभ सीधे पहुंचेगा।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार का जताया आभार
इस कानून के लागू होने पर बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष रुचि चौहान भट्ट ने सरकार का आभार जताया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान में एक बेहतर कदम बताया।