इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को तय करने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सोमवार, 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हो गई।
इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को तय करने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सोमवार, 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हो गई। इस मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रसिद्ध अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और दलीलें पेश कीं।
नमाज पर लगे पूरी तरह रोक
हिंदू पक्ष ने अदालत से मांग की है कि भोजशाला परिसर में हिंदुओं को 24 घंटे पूजा करने का अधिकार दिया जाए और वहां होने वाली नमाज पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
ASI रिपोर्ट का दिया हवाला
विष्णु शंकर जैन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि परिसर के स्तंभों पर मौजूद नक्काशी, संस्कृत के शिलालेख और अन्य पुरातात्विक साक्ष्य स्पष्ट रूप से इसके वाग्देवी (माता सरस्वती) मंदिर होने की पुष्टि करते हैं।
7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती
वर्तमान में लागू व्यवस्था (जिसके तहत मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज की अनुमति है) को बदलने की मांग की गई है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह व्यवस्था एक ऐतिहासिक गलती है जिसे सुधारा जाना चाहिए।
अवैध कब्जे का दावा
अदालत में यह तर्क दिया गया कि 1935 के बाद से इस परिसर के कुछ हिस्सों पर अवैध गतिविधियां शुरू हुईं और इसके मूल स्वरूप को बदलने का प्रयास किया गया।
नियमित सुनवाई का निर्णय
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ (जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच) ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब इसकी डे-टू-डे (नियमित) सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए यह मामला हाई कोर्ट के विवेक पर छोड़ दिया था। हिंदू पक्ष ने लंदन के म्यूजियम में रखी वाग्देवी की प्रतिमा को भी वापस लाने की मांग याचिका में शामिल की है। यह सुनवाई धार की भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
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